करियर की समस्या लेकर पहुंची छात्रा का एसपी ने बढ़ाया हौसला, अपनी कुर्सी पर बैठाया

करियर की समस्या लेकर पहुंची छात्रा का एसपी ने बढ़ाया हौसला, अपनी कुर्सी पर बैठाया

छतरपुर| संजय अवस्थी| छतरपुर (Chattarpur) के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक अलग ही नजारा देखने को मिला| जब बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा एसपी छतरपुर (SP Chhatarpur) से अपने कैरियर की समस्याओं को लेकर मिलने पहुंची तो एसपी छतरपुर में न सिर्फ उसका हौसला बढ़ाया बल्कि उसे अपनी कुर्सी पर ही बिठा दिया|

दरअसल छतरपुर की रहने वाली रश्मि अनुरागी नाम की बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा जिसके परिवार की हालत आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और उसका सपना एक पुलिस सब इंस्पेक्टर बनने का है लेकिन आर्थिक तंगी के चलते उसकी पढ़ाई में कई अड़चनें आ रही हैं| इसकी जानकारी जब छतरपुर के कुछ समाजसेवियों को लगी तो वह छात्रा को छतरपुर एसपी सचिन शर्मा (SP Sachin Sharma) से मिलाने ले पहुंचे, एसपी ने जब छात्रा के सपने और सपनों के बीच में आने वाली अड़चनों के बारे में सुना तो उन्होंने छात्रा का आत्मविश्वास बढ़ाया और उसकी हर संभव मदद की बात भी कही|

इसके बाद उन्होंने उसकी हौसला अफजाई के लिए उसे अपनी कुर्सी तक में बिठा दिया और भविष्य में छात्रा के सपने साकार हो इसके लिए उसे शुभकामनाएं भी दीं, छात्रा रश्मि अनुरागी को जहां पुलिस अधीक्षक से मिलकर आत्मबल मिला वही पुलिस अधीक्षक की कुर्सी पर बैठने का एहसास उसके लिए हमेशा के लिए यादगार बन गया, आपको बता दें छतरपुर पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा एक सफल पुलिस कप्तान के साथ-साथ अपने नेक कार्यों को लेकर आए दिन सुर्खियों में रहते हैं, उनके द्वारा बुजुर्गों के लिए चलाया जा रहा संकल्प अभियान न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश में चर्चा का विषय बना हुआ है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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