बालोद कलेक्ट्रेट में आदिवासी समाज का उग्र प्रदर्शन, बाबा बालक दास मामले पर जलाया चूल्हा

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बाबा बालक दास और कथित वन भूमि अतिक्रमण विवाद को लेकर सर्व आदिवासी समाज का गुस्सा खुलकर सामने आया। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर परिसर में धरना दिया, प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और देर शाम वहीं चूल्हा जलाकर खाना बनाया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बहस ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
बालोद कलेक्ट्रेट में आदिवासी समाज का उग्र प्रदर्शन, बाबा बालक दास मामले पर जलाया चूल्हा

बालोद जिले में सोमवार को उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए जब सर्व आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। प्रदर्शनकारी डौंडी लोहारा विकासखंड के तुएगोंदी रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए ट्रिपल लेयर बैरिकेड्स को पार किया और कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी शिकायतों और ग्राम सभा के फैसलों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर लोगों का आक्रोश बढ़ता गया। देर शाम तक जब कोई समाधान नहीं निकला तो प्रदर्शनकारियों ने परिसर में ही चूल्हा जलाकर भोजन बनाना शुरू कर दिया। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

बाबा बालक दास विवाद और वन भूमि अतिक्रमण का मामला

प्रदर्शन की मुख्य वजह तुएगोंदी क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद है। सर्व आदिवासी समाज के नेताओं का आरोप है कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा रहा है और इसकी जानकारी कई बार प्रशासन को दी जा चुकी है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्ष 2019 से इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

समाज के प्रमुख तुकाराम कोर्राम ने आरोप लगाया कि संबंधित क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कराया जा रहा है, जबकि वह भूमि वन क्षेत्र के दायरे में आती है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में शिकायत और कानूनी प्रक्रिया होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यही कारण है कि आदिवासी समाज ने इसे अपने अधिकारों और जमीन से जुड़े मुद्दे के रूप में देखते हुए बड़े आंदोलन का रूप दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि वन क्षेत्रों से जुड़े विवादों का समय पर समाधान नहीं होने से ऐसे आंदोलन लगातार बढ़ रहे हैं।

पुलिस-प्रदर्शनकारी आमने-सामने

दिनभर चले प्रदर्शन के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक पुलिस अधिकारी ने उनके जल रहे चूल्हे में पानी डाल दिया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ जगह महिलाओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी देखने को मिली।

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के बढ़ते दबाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाना पड़ा। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थानीय लोगों के अनुसार बालोद जिले में किसी प्रदर्शन के दौरान पहली बार वाटर कैनन का उपयोग किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच संवाद की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विवादित मामले की निष्पक्ष जांच हो और उनकी शिकायतों पर जल्द कार्रवाई की जाए। वहीं प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

Bhawna Choubey
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