छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से सशक्त नक्सल कैडर का अब अंत हो गया है, और पिछले 50 वर्षों से चल रहा खूनी संघर्ष महज दो वर्षों में खत्म हो गया है। प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘नक्सलवाद पर विजय’ में भाग लेने पहुंचे गृहमंत्री का मंच पर भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्होंने इस उपलब्धि को ‘ऐतिहासिक दिन’ करार दिया। उनके अनुसार, बस्तर की जनता ने अब नक्सलवाद को पूरी तरह नकार दिया है और शांति व विकास को प्राथमिकता दी है।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि कैसे यह 50 साल पुराना संघर्ष, जिसने बस्तर को दशकों तक विकास से वंचित रखा और हजारों जिंदगियां निगल लीं, उनकी सरकार के कार्यकाल में दो साल के भीतर निर्णायक मोड़ पर आ गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए हमेशा बातचीत के सभी विकल्प खुले रखे थे, लेकिन साथ ही सुरक्षाबलों की ऑपरेशनल तैयारियों में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और समर्पण को सलाम किया, जिनकी वीरता और रणनीतिक कार्रवाइयों के कारण नक्सलवाद पर बड़ी सफलता हासिल हुई है। इन ऑपरेशनों ने नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।
ये भी पढ़ें
उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर लगाए तीखे आरोप
उपमुख्यमंत्री ने इस दौरान विपक्ष पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब सरकार और सुरक्षाबल नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे थे, तब विपक्ष ने सहयोग देने की बजाय लगातार एनकाउंटरों को लेकर आरोप लगाए। इन आरोपों के जवाब में नक्सली भी प्रेस नोट जारी करते थे, जिससे एक भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जाती थी। विजय शर्मा ने कहा कि आज बस्तर की जनता ने अपने शांतिपूर्ण जीवन और विकास की आकांक्षा से विपक्ष के सभी आरोपों का जवाब दे दिया है। बस्तर के लोग अब हिंसा के बजाय मुख्यधारा में शामिल होकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं।
नक्सल उन्मूलन में स्थानीय भागीदारी की अहमियत पर जोर देते हुए गृहमंत्री ने बताया कि सरकार ने ग्राम पंचायतों के पदाधिकारियों से लगातार बातचीत की। इन चर्चाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों की जरूरतों, समस्याओं और नक्सलवाद से निपटने के उनके सुझावों को समझा गया। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय पत्रकारों की भूमिका को भी सराहा, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर जमीनी हकीकत को सामने लाया और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्थानीय स्तर पर मिले इस समर्थन ने सरकार की नीतियों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बस्तर में अब गोलियों की जगह सांस्कृतिक और खेल आयोजनों की धूम
आज बस्तर में शांति का माहौल है, जो कुछ साल पहले तक अकल्पनीय था। डिप्टी सीएम ने बताया कि जहां कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब बस्तर पंण्डुम और बस्तर ओलंपिक जैसे सांस्कृतिक और खेल आयोजनों की धूम रहती है। ये आयोजन स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को खेलकूद के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। प्रदेश की नक्सल पुनर्वास नीति को भी उन्होंने बेहद कारगर बताया, जिसके तहत नक्सलवाद से जुड़े लोगों को सम्मानजनक तरीके से सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिला है। लोगों को जागरूक करने और उन्हें पुनर्वास नीति का लाभ उठाने के लिए स्थानीय बोली, भाषा और रेडियो जैसे माध्यमों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया, जिससे संदेश दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचा।
विजय शर्मा ने ‘सरेंडर’ नहीं, ‘ससम्मान आत्मसमर्पण’ पर दिया जोर
विजय शर्मा ने ‘सरेंडर’ शब्द के बजाय ‘ससम्मान आत्मसमर्पण’ के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हथियार डालना नहीं, बल्कि एक नया जीवन शुरू करने का निर्णय है, जिसमें उन्हें समाज में पूरी गरिमा और सम्मान मिलता है। अब तक दो हजार से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो इस नीति की सफलता का प्रमाण है। गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि वे आज सचमुच ‘आजाद’ हुए हैं। यह आजादी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है, जो उन्हें दशकों के आतंक से मुक्ति दिलाती है।
नक्सलवाद ने बस्तर के जीवन के हर पहलू को गहरे तक प्रभावित किया था। गृहमंत्री ने राजा सलाम जैसे अनेक व्यक्तियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने नक्सलवाद का दंश झेला। उन्होंने बताया कि जल, जंगल, जमीन, पशु, पक्षी और यहां तक कि जानवर भी नक्सल आतंक से पीड़ित रहे थे। नक्सलियों द्वारा बिछाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) और बारूद ने अनगिनत निर्दोष लोगों और सुरक्षाकर्मियों की जान ली। ठेकेदारों की गला रेतकर हत्याएं की जाती थीं, जिससे विकास परियोजनाएं रुक जाती थीं और स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती थी। कार्यक्रम की शुरुआत में दिखाई गई एक हृदय विदारक डॉक्यूमेंट्री ने नक्सल पीड़ित लोगों की कहानियों को सामने रखा, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को इस भयावह समस्या की गंभीरता से परिचित कराया। यह डॉक्यूमेंट्री उन परिवारों के दर्द, संघर्ष और अब शांति की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाती थी। विजय शर्मा ने जोर देकर कहा कि अब बस्तर के हर नागरिक को इस आतंक से आजादी मिल गई है, और यह क्षेत्र अब विकास की नई इबारत लिखेगा।