छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, चांपा और रायगढ़ समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर छठ महापर्व का रंग चढ़ गया है। भारतीय रेलवे ने इस बार यात्रियों के लिए एक अनोखी पहल की है, जिसके तहत उद्घोषणा प्रणाली से पारंपरिक छठ गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। प्लेटफॉर्म पर “कांच ही बांस के बहंगिया”, “केलवा के पात पर उगेलन सूरजदेव” और “मंगिला हम वरदान हे गंगा मइया” जैसे गीतों ने वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया है। यात्रियों के लिए यह सिर्फ सफर नहीं, बल्कि घर और आस्था से जुड़ने का अनुभव बन गया है।
यात्रियों ने जताई खुशी, भावनाओं से जुड़ा अनुभव
रेलवे की इस पहल ने यात्रियों के मन में उल्लास और भक्ति दोनों भर दिए हैं। कई यात्री ट्रेन के शोर में भी छठ गीतों की मधुर धुन में खोए नजर आए। विशेष रूप से महिला यात्रियों ने कहा कि इस संगीत ने उन्हें अपने गांव और परिवार की याद दिला दी। वे खुद भी गीतों को गुनगुनाती हुई अपने गंतव्य की ओर बढ़ती दिखीं। इस पहल ने लोगों को सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और संस्कृति से दोबारा जुड़ने का भावनात्मक अनुभव दिया है। यात्रियों ने रेलवे का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस तरह की कोशिशें त्योहारों में घर जाने की थकान को भी भुला देती हैं।
भारतीय रेल की अनोखी सांस्कृतिक पहल
रेल प्रशासन का उद्देश्य इस पहल के जरिए यात्रियों को केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अनुभव भी देना है। छठ गीतों का उद्घोषणा प्रणाली में प्रसारण रेलवे की नई सांस्कृतिक सोच को दर्शाता है। इससे स्टेशन का माहौल पूरी तरह बदल गया है, जहां पहले ट्रेन की आवाजें गूंजती थीं, अब वहां लोकगीतों की मिठास बिखरी है। यात्रियों ने कहा कि भारतीय रेल अब केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने वाला माध्यम बनती जा रही है। इस पहल से स्टेशनों पर उत्सव जैसा माहौल बन गया है।
छठ पर्व के लिए 12 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें
छठ महापर्व के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने इस बार 12,000 से अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। नियमित ट्रेनों में भी अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं और प्लेटफार्म पर सभी सुविधाओं का खास ध्यान रखा जा रहा है। रेलवे ने यात्री मार्गदर्शन, सुरक्षा और आरक्षित सीटों की पर्याप्त व्यवस्था की है। इससे यात्रियों को न केवल सुगम यात्रा मिल रही है, बल्कि त्योहार की उमंग भी बरकरार है। छठ गीतों की गूंज और सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था ने मिलकर इस त्योहार को यादगार बना दिया है।





