छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज में सुरक्षाबलों ने आज एक बड़ी और समन्वित कार्रवाई करते हुए कुल 33 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। यह अभियान बस्तर रेंज के चार प्रमुख जिलों, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर में चलाया गया, जिसमें सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में हथियार, नकदी और सोना भी बरामद हुआ है। इस ऑपरेशन को नक्सल विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसने नक्सलियों के न सिर्फ कैडरों को पकड़ा है, बल्कि उनके वित्तीय और सैन्य आधार को भी बड़ा झटका दिया है।
बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
इस कार्रवाई में बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को सबसे बड़ी कामयाबी मिली है, जहां से सबसे ज्यादा 25 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। बीजापुर, जो छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहां से कुल 93 हथियार बरामद हुए हैं। इन हथियारों में चार एके-47 राइफलें और नौ एसएलआर राइफलें शामिल हैं, जो नक्सलियों द्वारा अपनी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख हथियार हैं। एके-47 और एसएलआर जैसे आधुनिक और घातक हथियारों की बरामदगी से पता चलता है कि नक्सली अपने संगठन को किस हद तक मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षाबलों ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर इन ठिकानों पर छापेमारी की और नक्सलियों को संभलने का मौका नहीं मिला।
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बीजापुर में नक्सलियों की वित्तीय संपत्ति बरामद
बीजापुर में बरामदगी का आंकड़ा वित्तीय तौर पर भी बेहद चौंकाने वाला है। यहां से सुरक्षाबलों ने कुल 14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस बरामदगी में 2.90 करोड़ रुपये नकद शामिल हैं, जो अक्सर लेवी और रंगदारी के माध्यम से जुटाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, 7.2 किलोग्राम सोना भी बरामद हुआ है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 11.16 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना मिलना नक्सलियों के मजबूत वित्तीय नेटवर्क और अवैध कमाई के स्रोतों को उजागर करता है। यह पैसा नए हथियार खरीदने, अपने कैडरों को भुगतान करने और अपनी विचारधारा को फैलाने में इस्तेमाल किया जाता था। इस बरामदगी को नक्सलियों के आर्थिक आधार पर एक करारा प्रहार माना जा रहा है, जिससे उनकी गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा।
अलग-अलग जिलों में मिली सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता
दंतेवाड़ा जिले में भी सुरक्षाबलों ने पांच नक्सलियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से आठ एसएलआर राइफलें सहित अन्य कई हथियार मिले हैं। दंतेवाड़ा का इलाका भी नक्सली हिंसा से बुरी तरह प्रभावित रहा है और यहां अक्सर सुरक्षाबलों पर हमले होते रहते हैं। इन गिरफ्तारियों से इलाके में नक्सलियों की पकड़ कमजोर होगी और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। सुरक्षाबलों का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था ताकि नक्सलियों को भनक न लग सके और वे भागने में सफल न हों।
सुकमा जिले में दो नक्सलियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। यहां से एक एलएमजी (लाइट मशीन गन) और दो एके-47 राइफलें बरामद हुई हैं। एलएमजी एक बेहद प्रभावी और घातक हथियार है, जिसका उपयोग अक्सर घात लगाकर किए गए हमलों में किया जाता है। हथियारों के साथ-साथ सुकमा से 10 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं, जो नक्सलियों के लिए एक और वित्तीय झटका है। सुकमा में ऑपरेशन यह दर्शाता है कि सुरक्षाबलों की पहुंच अब उन दूरदराज के इलाकों तक भी बन रही है, जिन्हें पहले नक्सलियों का गढ़ माना जाता था।
नारायणपुर जिले में एक नक्सली को पकड़ा गया, जिसके पास से एक एलएमजी बरामद हुई है। नारायणपुर में हुई यह गिरफ्तारी भी सुरक्षाबलों की लगातार सक्रियता और बेहतर खुफिया तंत्र का परिणाम है। बस्तर रेंज के इन चारों जिलों में एक साथ चलाए गए इन अभियानों ने नक्सलियों के संगठन पर बहुआयामी प्रहार किया है, जिससे उनके हौसले पस्त हुए हैं और उनके नेटवर्क को काफी हद तक कमजोर किया गया है।
सुरक्षाबलों के इस संयुक्त और बड़े अभियान ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों की गिरफ्तारी और हथियारों व नकदी की बरामदगी से उनकी संगठनात्मक क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा। यह कार्रवाई नक्सलियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षाबल अब इन क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से और आक्रामक तरीके से काम कर रहे हैं। इस सफलता से स्थानीय आबादी में भी सुरक्षाबलों के प्रति विश्वास बढ़ा है और उन्हें नक्सली दबाव से कुछ हद तक मुक्ति मिलेगी।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की पहल
नक्सलियों के खिलाफ यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी या हथियार बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके वित्तीय संसाधनों पर भी गहरा प्रहार है। जब उनके पास धन की कमी होती है, तो उनकी भर्ती, प्रशिक्षण, और हथियारों की खरीद प्रभावित होती है, जिससे उनकी समग्र क्षमता कमजोर होती है। बरामद किया गया सोना और नकदी अक्सर स्थानीय लोगों से रंगदारी, सरकारी परियोजनाओं से लेवी और ठेकेदारों से वसूली के माध्यम से जमा किया जाता था। सुरक्षाबलों का कहना है कि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे ताकि बस्तर क्षेत्र को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाया जा सके और स्थानीय निवासियों को भयमुक्त माहौल मिल सके। यह सफलता स्थानीय पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रणनीति का परिणाम है।