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चलती ट्रेन में तकनीकी खराबी! छिंदवाड़ा में पैसेंजर ट्रेन के तीन डिब्बे इंजन से अलग

Written by:Bhawna Choubey
Published:
छिंदवाड़ा में चलती पैसेंजर ट्रेन से तीन डिब्बे इंजन से अलग हो गए। धीमी रफ्तार और समय पर सटीक कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। रेलवे की प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी की आशंका, यात्रियों की सुरक्षा बरकरार।
चलती ट्रेन में तकनीकी खराबी! छिंदवाड़ा में पैसेंजर ट्रेन के तीन डिब्बे इंजन से अलग

छिंदवाड़ा में आज एक बड़ा ट्रेन हादसा होने से टल गया। सिवनी-बैतूल स्पेशल पैसेंजर ट्रेन के तीन डिब्बे इंजन से अलग हो गए लेकिन गनीमत रही कि ट्रेन की रफ्तार धीमी थी और किसी यात्री को चोट नहीं आई। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी तुरंत अलर्ट हो गए और तकनीकी समस्या को सही किया गया।

अचानक धमाके जैसी आवाज सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। हालांकि ट्रेन का समय पर नियंत्रण और कर्मचारियों की त्वरित प्रतिक्रिया ने बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। रेलवे अधिकारियों ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है ताकि समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।

कैसे अलग हुए ट्रेन के तीन डिब्बे

सिवनी-बैतूल पैसेंजर ट्रेन छिंदवाड़ा जंक्शन से गुजर रही थी। स्टेशन से कुछ ही दूरी तय करने के बाद यात्रियों ने अचानक तेज धमाके की आवाज सुनी।प्राथमिक जांच में यह पता चला कि तीन डिब्बे इंजन से अलग हो गए थे। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सामान्य नहीं है और इसमें तकनीकी खराबी की संभावना जताई जा रही है। ट्रेन के डिब्बे अलग होने का कारण क्या था और यह तकनीकी खराबी कैसे हुई इसकी विस्तृत जांच जारी है।

यात्रियों में अफरा-तफरी और सुरक्षा उपाय

डिब्बे अलग होने की घटना के बाद यात्रियों में डर और अफरा-तफरी फैल गई। हालांकि ट्रेन की धीमी गति और कर्मचारियों की तत्परता ने स्थिति को नियंत्रित किया। रेलवे की टीम ने तुरंत अलग हुए डिब्बों को इंजन से जोड़कर सुरक्षा जांच पूरी की।

करीब एक घंटे के अंदर सुरक्षा और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ट्रेन अपने गंतव्य बैतूल के लिए रवाना हुई। अधिकारियों ने यात्रियों से कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है और रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

ट्रेन हादसों में तकनीकी खराबी की बढ़ती चिंता

रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर कपलिंग सिस्टम या ब्रेकिंग मैकेनिज्म में तकनीकी खराबी के कारण होती हैं। यदि ट्रेन उच्च गति पर होती, तो गंभीर दुर्घटना होने की संभावना थी।

छिंदवाड़ा हादसे ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग जरूरी है।