निजी अस्पतालों की बड़ी लापरवाही- खुले में फेंक रहे संक्रमित पीपीपी किट, मेडिकल वेस्ट

निजी अस्पतालों की बड़ी लापरवाही- खुले में फेंक रहे संक्रमित पीपीपी किट, मेडिकल वेस्ट

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। कोरोना महामारी (Corona Crisis) में जहाँ लोगों को संक्रमण (Infection) से बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन ग्वालियर में संचालित कुछ निजी अस्पताल (Private Hospital)  संक्रमण को फ़ैलाने के काम काम कर रहे हैं।  वे खुले में कोरोना संक्रमित पीपीई किट (PPE Kit) और मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) फेंक रहे हैं। स्थानीय लोग अस्पताल की इस हरकत से परेशान और दहशत में है। उनका कहना है कि डॉ सराफ ने पूरे क्षेत्र में संक्रमण का खतरा बढ़ा दिया है।

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ग्वालियर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 57 में जिन्सी नाला नंबर एक में संचालित सराफ अस्पताल के पीछे रहने वाले लोगों ने आरोप लगाए हैं कि उनके घर के पास संचालित डॉ सराफ अस्पताल उनके यहाँ की संक्रमित पीपीई किट (PPE Kit) और अन्य मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) खुले में फेंकते हैं. जिससे पूरे क्षेत्र में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पिछले दिनों शिकायत करने पर नगर निगम की गाड़ी कचरा उठाकर ले गई लेकिन फिर से अस्पताल ने खुले में हमारे घर के पास संक्रमित पीपीई किट (PPE Kit) और अन्य मेडिकल वेस्ट (Medical Waste)खुले में फेंक दिया।

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स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉ सराफ से इस बारे में कई बार शिकायत की लेकिन वे समझने को तैयार नहीं है उल्टा अभद्र व्यवहार करते हैं संक्रमित पीपीई किट (PPE Kit) और अन्य मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) खुले में फेंक रहे हैं। लोगों का कहना है कि डॉ सराफ ने हमारे जीवन को खतरे में डाल दिया है।  उनके कारण पूरा क्षेत्र संक्रमित हो रहा है। लोगों ने प्रशासन से निवेदन किया है कि मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) खुले में नहीं फेंकने के नियम और कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ने वाले डॉ सराफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये और खुले में पीपीई किट (PPE Kit) और मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) फेंकना बंद कराया जाये।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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