डबरा में 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों पर 5.91 करोड़ रुपये की वसूली, 15 दिन में भुगतान नहीं किया तो बैंक खाते और संपत्ति होगी कुर्क

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश पर डबरा और पिछोर क्षेत्र की 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली, भुगतान नहीं करने पर कुर्की की चेतावनी
Stone Crusher recovery notice

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ग्वालियर जिले के डबरा और पिछोर क्षेत्र में संचालित 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के मामले में प्रशासन ने वसूली की कार्रवाई शुरू की है। इन इकाइयों पर कुल 5 करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि बकाया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों के आधार पर प्रशासन ने संबंधित क्रेशर संचालकों को 15 दिन के भीतर बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर उनके बैंक खाते और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

नायब तहसीलदार, वृत्त बिलौआ, तहसील डबरा के कार्यालय से 31 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस नोट में सभी 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों के नाम और उनके खिलाफ वसूली योग्य राशि का विवरण दिया गया है। प्रशासन के मुताबिक, संबंधित इकाइयों द्वारा पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किए जाने पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की थी। यह राशि अब तक जमा नहीं होने के कारण राजस्व प्रशासन के स्तर पर वसूली की कार्रवाई की जा रही है।

एक ही क्षेत्र की 34 इकाइयों पर करोड़ों का बकाया

प्रशासन की सूची में डबरा और पिछोर क्षेत्र की अलग-अलग स्टोन क्रेशर इकाइयों पर 2 लाख 20 हजार रुपये से लेकर 27 लाख 30 हजार रुपये तक की राशि बकाया दिखाई गई है। कई इकाइयों पर 17 लाख रुपये, जबकि कुछ पर 24 लाख रुपये से अधिक की वसूली प्रस्तावित है।

सूची के अनुसार, मैसर्स वैभव स्टोन क्रेशर, मैसर्स श्री सिद्धि विनायक स्टोन क्रेशर और मैसर्स नायब जी इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई इकाइयों के नाम दर्ज हैं। सभी 34 इकाइयों की बकाया राशि जोड़ने पर कुल रकम 5 करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये होती है। इतनी बड़ी राशि की वसूली का मामला सामने आने के बाद सवाल यह भी है कि पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि अब तक जमा क्यों नहीं हो सकी।

15 दिन की मोहलत, इसके बाद कुर्की की चेतावनी

प्रशासन ने संबंधित स्टोन क्रेशर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अवधि के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की बकाया राशि जमा कराई जाए। ऐसा नहीं करने पर बैंक खातों और संपत्ति की कुर्की सहित वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, जारी प्रेस नोट में यह नहीं बताया गया है कि प्रत्येक इकाई पर किस विशेष पर्यावरणीय उल्लंघन के कारण क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई थी और यह बकाया कब से लंबित है। दस्तावेज में किसी स्टोन क्रेशर को तत्काल बंद करने का आदेश भी नहीं दिया गया है। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई बकाया क्षतिपूर्ति राशि की वसूली पर केंद्रित है।

पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई, अब वसूली पर नजर

डबरा और पिछोर क्षेत्र की 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों पर एक साथ इतनी बड़ी रकम बकाया होने से पर्यावरणीय नियमों के पालन और उनकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिन उल्लंघनों के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की, उनके सुधार के लिए संबंधित इकाइयों ने क्या कदम उठाए हैं, इसकी जानकारी प्रेस नोट में नहीं दी गई है।

अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देश के बाद कितने क्रेशर संचालक निर्धारित अवधि में बकाया राशि जमा करते हैं और भुगतान नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई कब शुरू होती है। फिलहाल 34 स्टोन क्रेशर इकाइयों के सामने करोड़ों रुपये की बकाया राशि जमा करने की चुनौती है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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