डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मीबाई को हाईकोर्ट का नोटिस, पद की वैधता पर उठे सवाल, 26 फरवरी तक जवाब तलब

डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मीबाई की नियुक्ति को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक RTI के जवाब के बाद दायर याचिका पर ग्वालियर खंडपीठ ने उन्हें नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 26 फरवरी तक अध्यक्ष पद से जुड़े दस्तावेजों पर जवाब मांगा है।
Dabra Municipality Chairperson Lakshmibai

Dabra Municipality Chairperson Lakshmibai

ग्वालियर। डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मीबाई की नियुक्ति और पदग्रहण की प्रक्रिया अब कानूनी जांच के दायरे में आ गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अध्यक्ष लक्ष्मीबाई को नोटिस जारी कर 26 फरवरी 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह पूरा मामला अध्यक्ष पद के लिए जारी होने वाली शासकीय अधिसूचना से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता सत्येंद्र कुमार दुबे ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह रिट याचिका (WP/410/2026) दायर की है। इसमें उन्होंने अध्यक्ष पद की वैधानिकता को चुनौती देते हुए मंडेमस, सर्टियोरारी और क्वो-वारंटो जैसी राहत की मांग की है।

RTI से शुरू हुआ विवाद

इस प्रकरण की नींव एक सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन से पड़ी। 15 दिसंबर 2025 को याचिकाकर्ता ने ग्वालियर कलेक्टर कार्यालय में एक आवेदन लगाकर डबरा नगर पालिका अध्यक्ष के निर्वाचन या पदग्रहण से संबंधित शासकीय अधिसूचना (राजपत्र) की जानकारी मांगी थी। RTI में पूछा गया था कि क्या राज्य शासन ने इस पद के लिए कोई गजट नोटिफिकेशन जारी किया है।

नगर पालिका के जवाब ने खड़े किए सवाल

RTI के जवाब में 5 जनवरी 2026 को डबरा नगर पालिका परिषद ने एक पत्र जारी कर चौंकाने वाली जानकारी दी। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया कि मांगी गई जानकारी यानी अध्यक्ष पद की अधिसूचना से संबंधित कोई भी दस्तावेज उनके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। नगर पालिका ने यह भी कहा कि उनके पास इसकी कोई प्रमाणित प्रति भी मौजूद नहीं है, जिसकी एक प्रतिलिपि जिला निर्वाचन अधिकारी को भी भेजी गई थी।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

नगर पालिका से मिले इसी जवाब को आधार बनाकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि अध्यक्ष लक्ष्मीबाई 26 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से अदालत में अपना पक्ष रखें।

नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर निर्धारित समय सीमा में जवाब पेश नहीं किया गया तो अदालत याचिका पर एकपक्षीय सुनवाई कर सकती है। अब सभी की निगाहें 26 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसके बाद ही मामले की अगली दिशा तय होगी।

Ankita Chourdia
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