भितरवार में पहुँचा टिड्डी दल, समय रहते कृषि विभाग ने बाहर खदेड़ा

भितरवार में पहुँचा टिड्डी दल, समय रहते कृषि विभाग ने बाहर खदेड़ा

डबरा/सलिल श्रीवास्तव

कोरोना कहर के बीच टिड्डीयों का आतंक भी मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं अन्य राज्यों में फैला हुआ है। इसको नियंत्रित करने में पूरा प्रशासन लगा हुआ है। अब अन्य जगहों से होता हुआ टिड्डी दल डबरा और भितरवार विकासखंड के गांवों में भी पहुंच गया है और इस कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे दिख रही हैं।

मंगलवार बुधवार को चीनोर और भितरवार क्षेत्र के गांव में बड़ी संख्या में टिड्डी दल को ग्रामीणों ने देखा जिससे उसमें भय पैदा हो गया। एक साथ लाखों की संख्या में टिड्डी झुंड दिखाई दिए, दो दिन पहले ही टिड्डी दल ने गांव में हमला किया जिसकी सूचना मिलने पर ग्वालियर से टिड्डी दल नियंत्रण की टीम एवं डबरा की कृषि विभाग की टीम भी घरसोदी पहुंची। यहां देखा गया कि लाखों की संख्या में टिड्डियों का दल पेड़ों पर पसरा हुआ है, अच्छी बात ये कि अभी किसानों की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन इसी तरह इनकी संख्या बढ़ती रही तो किसानों को काफी नुकसान की आशंका थी। डबरा विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बीके मिश्रा ने बताया कि जैसे ही हमें टिड्डी दल की सूचना मिली हम मौके पर पहुंचे तो वहां पर काफी संख्या में टिड्डी दल मौजूद था। ग्वालियर से आई जिला स्तरीय टीम के सहयोग से हमने डबरा और आंतरी की फायर बिग्रेड की सहायता से कीटनाशक दवाई का छिड़काव किया और ट्रैक्टर एवं लोगों की सहायता से टिड्डी दल को आज दोपहर ग्वालियर जिले से बाहर करने में सफलता मिली अब यह टिड्डी दल दतिया जिले की सीमा में चला गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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