मलैया के बेटे ने शिवराज सरकार को बताया ‘अधूरी सरकार’

मलैया के बेटे ने शिवराज सरकार को बताया ‘अधूरी सरकार’

दमोह| वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया ने शिवराज सरकार को अधूरी सरकार बता दिया| दरअसल, सिद्धार्थ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे| इस दौरान उन्होंने जेल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए| सिद्धार्थ मलैया का आरोप है कि जेल में लेनदेन कर अपराधियों को अनैतिक संरक्षण दिया जाता है| अधूरी सरकार ऐसी ही होती है इसलिए जनता को याद करना पड़ेगा| दोष सिर्फ सरकार का या नेताओं का नहीं है, जतना का भी है, मेरा और आपका भी है|

उन्होंने कहा जेलर का पुत्र पैसों का लेनदेन कर अपराधियों को बाहर निकलवाने में मदद करता है| मलैया का आरोप है कि जेल से अपराधी रात के 11:00 बजे निकलते हैं और सुबह 4:00 बजे वापस पहुंच जाते हैं । जिला प्रशासन पर आरोप है कि जिले का चर्चित देवेन्द्र चौरसिया हत्याकांड जिसमें पथरिया बीएसपी विधायक रामबाई सिंह के परिजनों को आरोपी बनाया गया है उस प्रकरण में अभी हाल स्व. चौरसिया के परिजनों को राजीनामा के लिये अनेक तरह से प्रताड़ित करने के आरोप भी परिजनों की ओर से लगाये गये है।

आज इस संबंध में एक ज्ञापन जिला पुलिस अधीक्षक को सौंपा गया । स्व. चौरसिया के पुत्र ने जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया को अपनी आप बीती सुनाई जिसे सुनकर दोनों रो पड़े|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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