दमोह की कृषि उपज मंडी में शनिवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब व्यापारियों ने अचानक डाक नीलामी बंद कर दी। इस अप्रत्याशित कदम से आक्रोशित किसानों ने तत्काल मंडी में तालाबंदी कर दी और मुख्य मार्गों पर चक्का जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों का कहना है कि व्यापारियों द्वारा मनमाने ढंग से नीलामी रोके जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद किसान संगठनों के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंडी सचिव से मिला और अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रतिनिधिमंडल में जिला विकास सलाहकार समिति दमोह के सदस्य एडवोकेट हरिश्चंद्र पटेल, भारतीय किसान संघ के संभागीय मंत्री हेमंत पटेल, राजकुमार राय बमनपुरा, अजय असाटी राजापटना, सुरेश पटेल सहित कई अन्य किसान भाई शामिल थे। इन सभी ने मंडी सचिव से मुलाकात कर अपनी पीड़ा व्यक्त की। किसानों ने बताया कि व्यापारी बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के अनायास ही अनाज की लगी ढेरियों की डाक नीलामी रोक दी। इससे किसान अत्यधिक आक्रोशित हो गए। किसानों ने लगातार मंडी प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं हुई, तब उन्होंने मजबूर होकर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और मंडी के मुख्य गेट बंद कर दिए।

क्या हैं किसानों की मांगें?
किसानों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखा है। उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग है कि जिन किसानों की डाक नीलामी नहीं हुई और जिन्हें अपना अनाज वापस गांव ले जाना पड़ रहा है, उन्हें व्यापारियों या मंडी बोर्ड की ओर से मुआवजा दिया जाए। किसानों के अनुसार, उन्हें गांव से मंडी तक अपना माल ट्रैक्टर से लाने में लगभग 2000 रुपये का खर्च आता है। अब जब नीलामी नहीं हुई है और उन्हें अनाज वापस ले जाना पड़ेगा, तो इसमें भी 2000 रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इस प्रकार, प्रत्येक प्रभावित किसान को कुल 4000 रुपये का मुआवजा दिलाया जाए। यह राशि उनके आने-जाने और समय की बर्बादी के बदले होनी चाहिए।
किसानों की दूसरी महत्वपूर्ण मांग उन व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से संबंधित है, जिन्होंने बिना किसी सूचना के अचानक डाक नीलामी बंद कर दी। किसान संगठनों का आरोप है कि इन व्यापारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी मनमानी साबित करने के लिए यह कार्य किया है। ऐसे में, इन सभी मनमानी करने वाले व्यापारियों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह कदम मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
किसान संगठनोंं ने सौंपा ज्ञापन
किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने दमोह के एसडीएम महोदय और कृषि उपज मंडी सचिव के समक्ष अपना पत्र सौंपते हुए यह भी निवेदन किया कि जब तक मंडी की व्यवस्था सुचारु रूप से ठीक नहीं हो जाती, तब तक मंडी का संचालन न किया जाए। उनका मानना है कि वर्तमान अव्यवस्था में मंडी का संचालन जारी रखना किसानों के लिए और अधिक परेशानी का सबब बनेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर शीघ्रता से विचार कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और मंडी प्रबंधन की होगी। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपने नुकसान की भरपाई और न्याय मिलने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह घटना मंडी प्रशासन और व्यापारियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है और किसानों की एकजुटता का प्रमाण है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।






