खबर का असर: युवक के बाल पकड़कर घसीटने वाले पुलिसकर्मी को किया गया सस्पेंड

खबर का असर: युवक के बाल पकड़कर घसीटने वाले पुलिसकर्मी को किया गया सस्पेंड

दमोह, गणेश अग्रवाल| जिला अस्पताल में दमोह (Damoh) पुलिस कर्मी द्वारा एक व्यक्ति को घसीटते हुए ले जाने का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है| जिला अस्पताल के भीतर का यह वीडियो किसी के द्वारा बनाए जाने के बाद वायरल कर दिया गया| जिसके बाद यह वीडियो लोगों में शेयर किया जा रहा है| वही वीडियो सामने आने के बाद जब मामले की जांच की गई तो और ही खुलासा सामने आया है| जिसमें एक युवक द्वारा शराब पीकर हंगामा किए जाने के कारण पुलिस द्वारा उसे बाहर किया जाना बताया गया है| वहीं युवक ने भी शराब पीकर हंगामा मचाना स्वीकार किया है| युवक को घसीटने वाले पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है|

दमोह अस्पताल (Damoh HOspital) में बुधवार की देर रात एक युवक जो अपने पिता का इलाज कराने के लिए आया था| युवक के द्वारा इसी दौरान शराब पिए जाने के बाद हंगामा किया जा रहा था| युवक द्वारा हंगामा किए जाने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने उसे बाहर करने का प्रयास किया, लेकिन उसी दौरान एक पुलिसकर्मी वहां पर पहुंच गया और जब पुलिसकर्मी ने यह देखा तो उसने भी उस को बाहर निकलने के लिए कहा| लेकिन शराबी द्वारा हंगामा जारी रखने के कारण पुलिस कर्मी द्वारा उसे बाल पकड़कर बाहर घसीट कर ले जाया गया| इसी घटना का वीडियो अस्पताल में मौजूद लोगों द्वारा बनाकर वायरल कर दिया गया| वही जब इस मामले की जांच की गई, तो शराब पीने वाले युवक ने भी यह स्वीकार किया कि उसके द्वारा शराब पीकर हंगामा किया जा रहा था| इतना ही नहीं अस्पताल से बाहर निकलने के बाद उसने अपनी बाइक एक अन्य चालक से टकरा दी थी. जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक की एमएलसी कराई थी|

इस मामले पर जहां युवक ने शराब पीकर हंगामा करने की बात स्वीकार की है, तो सिक्योरिटी गार्ड ने भी बताया कि हंगामा किए जाने के कारण ही उसे बाहर भगाए जाने का प्रयास किया जा रहा था. जांच अधिकारी कोतवाली टीआई ने बताया कि आरक्षक द्वारा युवक के बाल पकड़कर खींचे जाने के मामले में आरक्षक को सस्पेंड किया गया है. वही पूरे मामले की जांच की जा रही है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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