विधायक ने किसे दिया ओपन चैलेंज, ‘मां का दूध पिया है तो सामने आकर लड़े’

विधायक रामबाई

दमोह| गणेश अग्रवाल| दमोह जिले (Damoh District) की पथरिया विधानसभा क्षेत्र की विधायक रामबाई (MLA Rambai) अपने दबंग अंदाज़ के लिए अक्सर चर्चा में रहती हैं| इस बार उन्होंने पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया (Jayant Malaiya) के परिवार को खुली चुनौती दी है| पत्रकारों से चर्चा करते हुए रामबाई ने कहा माँ का दूध पिया है तो सामने आकर लड़ लें| पाप करने वाले पुण्य करने वालो से जीत नहीं सकते|

पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के सुपुत्र भाजपा नेता सिद्धार्थ मलैया द्वारा दबंग विधायक रामबाई सिंह के परिवार का विरोध किए जाने के बाद और देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में चौरसिया परिवार का समर्थन किए जाने के चलते अब रामबाई सिंह मलैया परिवार के विरोध में खुलकर सामने आ गई है| दमोह में पत्रकार पर हमले की घटना को लेकर आक्रोशित विधायक रामबाई ने कहा कि इस तरह की घटना के पीछे पूर्व वित्त मंत्री के बेटे हैं, वो लगातार ऐसे कृत्य कर रहे हैं, जिससे जिले की शांति भंग हो| जनता ने उन्हें जवाब दे दिया, 15 साल शासन किया खूब उठापठक की| मुझे भी कितना प्रताड़ित किया, मुझे लेकर ही पत्रकार के साथ यह घटना उन्होंने की है|

रामबाई ने यहां तक कहा कि मलैया परिवार के द्वारा उनको आतंकवादी घोषित नहीं किया गया| बाकी उन्होंने सब कुछ कर लिया| अभी तक पीछे से वार किया गया है, अब वह चैलेंज देती हैं कि मलैया परिवार के लोग खुलकर सामने आकर लड़ाई लड़े| रामबाई सिंह ने कहा कि यदि मलैया परिवार ने मां का दूध पिया है तो वे आमने सामने की लड़ाई लड़े| रामबाई सिंह ने यह भी कहा कि इस जन्म में तो उनसे वे लड़ नहीं सकते, क्योंकि पुण्य करने वालों से पाप करने वाला व्यक्ति लड़ नहीं सकता, पुण्य करने वाला ही जीतेगा| इसके अलावा उन्होंने चैलेंज देते हुए खुलकर सामने आकर लड़ने की बात कही|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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