ना डरना है ना घबराना है, हमें तो बस कोरोना से जीतना है -डॉ सुकर्ण मिश्रा

ना डरना है ना घबराना है, हमें तो बस कोरोना से जीतना है -डॉ सुकर्ण मिश्रा

दतिया| सत्येंद्र रावत| कोरोना संकटकाल में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की तरह उनके पुत्र भाजपा युवा नेता डॉ सुकर्ण मिश्रा भी जनसेवा में जुटे हुए हैं| गुरूवार को उन्होंने समाजसेवियों के साथ बैठकर रोटियां सेंकी और भोजन के पैकेट पैक करवाए ।

सुकर्ण मिश्रा ने गुरुवार को दतिया नगर की बस्तियों में राशन सामग्री वितरण की| गुरुवार को वे दोपहर 12:00 बजे दतिया पहुंचे जहां पर समाजसेवियों द्वारा दतिया नगर में राहत सामग्री वितरण की जा रही है, उन स्थानों पर पहुंचे और समाजसेवियो के साथ बैठकर युवा नेता ने रोटिया सेकी और राहत सामग्री के पैकेट बनवाये।

भाजपा नेता सुकर्ण मिश्रा वार्ड क्रमांक 32 मैं पहुंचे जहां पर पूर्व पार्षद मुकेश यादव के द्वारा बार्ड के जरूरत मंद नागरिकों को राहत सामग्री वितरण की जा रही थी| सुकर्ण मिश्रा दतिया नगर की विभिन्न वार्डों में पहुंचे और राहत सामग्री वितरण की | सुकर्ण ने वार्डों के नागरिकों को समझाते हुए कहा लॉक डाउन का पालन करें अपने-अपने घर पर रहे। अगर आपको किसी भी प्रकार की समस्या या सामग्री की जरूरत हो तो आप हमको कॉल कर सकते हैं| ना डरना है ना घबराना है कोरोना से जीतना है, हिम्मत बनाए रखें आप के साथ आपका विधायक डॉ नरोत्तम मिश्रा सदैव साथ हैं आपको कोई परेशानी नहीं होने देंगे आप निश्चिंत होकर अपने अपने घरों पर रहें और स्वस्थ रहें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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