संकट के समय जरूरतमंदों की मदद में जुटे नरोत्तम, खुद तली पूड़ियां

संकट के समय जरूरतमंदों की मदद में जुटे नरोत्तम, खुद तली पूड़ियां

दतिया| सत्येन्द्र रावत| जहां एक और पूरा देश कोरोनावायरस की महामारी से जूझ रहा है वही गरीब मजदूर असहाय लोगों को पेट भरने के लाले पड़े हुए हैं और जहां समाज सेवा का दम भरने वाले लोग अपने घरों की चारदीवारी में कैद होकर रह गए हैं | ऐसे लोग केवल मीडिया में आने और फोटो खिंचवाने के लिए ही बाहर निकलते हैं लेकिन इस बीच अपने कार्यकर्ताओं और दतिया विधानसभा के मतदाताओं के बीच जब पूरे देश में महामारी फैली हुई है तब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा गरीबों को भोजन व्यवस्था करवाने के लिए अपने कार्यकर्ताओं संग दतिया पहुंचे तो उन्होंने खुद अपने हाथों से कड़ाई मैं पूडी तली और पैकेट बनवा कर गरीबों को बटवाने गलियों और मोहल्लों में पहुंच गए..।

नरोत्तम भोपाल तो चले जाते हे लेकिन उनका मन दतिया में ही रहता हे | कोई भी जरूरत मंद संकट की इस घडी में भूखा ना सो जाऐ इसलिए वह अनेको प्रकार से जरूरतोंमंदो की सेवा करने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हे ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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