नवागत पुलिस अधीक्षक ने रतनगढ़ मंदिर जाकर होली के त्यौहार की तैयारियों का लिया जायजा

नवागत पुलिस अधीक्षक ने रतनगढ़ मंदिर जाकर होली के त्यौहार की तैयारियों का लिया जायजा

सत्येन्द्र रावत। दतिया

नावगत पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ रतन गढ़ माता मंदिर पहुंचे। जहां होली के त्यौहार एवं आगामी नवरात्रि की तैयारियों का जायजा लिया एवं विभिन्न स्थानों ( धीरपुरा, इंदरगढ़, थरेट, भंगुआपुरा, अतरेटा) का भ्रमण किया। और पुलिस अधीक्षक द्वारा थानों के भ्रमण के दौरान थानों की साफ-सफाई थानों का रिकॉर्ड, मालखाना, बंदीगृह, सीसीटीवी कैमरे चेक किए। तथा आवश्यक निर्देश दिए एवं होली के त्यौहार के संबंध में निर्देश दिए।कि थाना प्रभारी सुनिश्चित करें कि होलिका दहन का स्थान विवादित ना हो थाना क्षेत्र में पुलिस के फिक्स पॉइंट लगाए जावे मोबाइल पार्टियों से लगातार भ्रमण किया जाए।

शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्यवाही की जावे और हुङदगियो एवं मनचलों पर नजर रखी जाए। ताकि थाना क्षेत्रों में शांतिपूर्ण तरीके से होली का त्यौहार मनाया जाए। पुलिस अधीक्षक द्वारा रतनगढ़ माता मंदिर जाकर होली के त्यौहार एवं आगामी नवरात्रि की तैयारियों का जायजा लिया, पार्किंग व्यवस्था देखी, बैरिकेट्स का निरीक्षण किया, दर्शनार्थियों के आने-जाने के रास्ते का निरीक्षण कर पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी को निर्देश दिया। कि एंबुलेंस फायर बिग्रेड की व्यवस्था हेतु संबंधित से संबंध में रखी नवरात्रि पर आने वाले पुलिस बल के ठहरने एवं भोजन की उचित व्यवस्था की जावे मेले से दुकानें निर्धारित स्थान पर लगाई जाना सुनिश्चित करें पाकिटमारो एवं चैनस्नैचरो पर नजर रखने हेतु सीसीटीवी एवं विशेष टीम बनाई जावे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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