जनसंघर्ष वाहिनी के स्वयंसेवक पहुंचे किसान मंड़ी, किया जनसंपर्क

जनसंघर्ष वाहिनी के स्वयंसेवक पहुंचे किसान मंड़ी, किया जनसंपर्क

दतिया।सत्येन्द्र सिंह रावत।

भाण्डेर जनसंघर्ष वाहिनी के स्वयंसेवकों द्वारा किसान मंड़ी पहुचकर दिहाड़ी कामगर मजदूरों पल्लेदारों, हम्मालों, से संपर्क कर भाण्डेर उद्योग इकाई की स्थापना के लिये जन समर्थन मॉगा। बड़ी संख्या में कामगर मजदूर हम्मालों ने पुरजोर समर्थन देने की बात कही। इस दौरान जनसंघर्ष वाहिनी के प्रमुख स्वयंसेवक हाकिम सिंह यादव ने कहा कि यदि भाण्डेर में उद्योग इकाई की स्थापना होती है तो आपलोगो को बाहर काम करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। भाण्डेर में ही आपको काम मिलेगा।

इसलिये आप सभी कृतसंकल्पित होकर जनसंघर्ष वाहिनी के साथ सहयोग करें।औद्योगिक इकाई के संदर्भ में हमारी आबाज बुलंद करें।उन्होंने कहा कि मेरा तो बस यही नारा है कि “चाहे कोई दल हो,उधोग लगाने पर बल हो भाण्डेर में बस उद्योग हो । इसी क्रम में जनसंघर्ष वाहिनी के वरिष्ठ स्वयंसेवक माताप्रसाद दुबे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि उद्योग इकाई स्थापना से हमारा भाण्डेर समृद्ध एवं संपन्न होगा। यहॉ के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। एवं एडवोकेट अरुणेश सक्सेना ने कविता के माध्यम से अपनी बात रखी।

में आपको बता दूँ कि अभी हाल ही में दतिया जिले में लगभग 22000 प्रवासी मजदूर पंजीकृत हुए है। जिनमें लगभग 7000 प्रवासी मजदूर भाण्डेर अनुभाग मे पंजीकृत किये गए हैं। जिनको काम देने का दायित्व सरकार पर है। भाण्डेर में यदि कोई भी सार्वजनिक क्षेत्र का औद्योगिक संयंत्र लगता है तो निश्चित रूप से बड़ी संख्या में क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। भाण्डेर का आमजन समृद्ध होगा। आज इस अवसर पर मामू खान, नम्मू खॉ,फरीद खॉ, फिरोज खॉ, सद्दाम पठान, छोटू खॉ, नमाजी खॉ, इसराइल खॉ, कानू खॉ, सल्ला, भैया खान, आदि हम्मालों ने संकल्प लिया कि हम सब जनसंघर्ष वाहिनी केो साथ है। हम भी प्राणप्रण होकर संघर्ष करेंगे।

इस अवसर पर संपर्क करने बालों में प्रमुखतः हाकिम सिंह यादव, माताप्रसाद दुबे, अरूणेश सक्सेना एडवोकेट, स्वदेश श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, राजेन्द्र यादव, पूरन सिंह यादव, हाकिम सिंह यादव एडवोकेट, विनोद व्यास, हिमांशु गुप्ता, अभिषेक घनघौरिया, राजेन्द्र नामदेव, राघवेन्द्र यादव अजीतपुरा, आदि स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews