
सत्येंद्र रावत।दतिया।
भाइयों को तिलक लगाने आई महिलाओं ने जेल में खुली मुलाकात नही होने से नाराज़ होकर ठण्डी सड़क पर जाम लगा दिया । महिलाएँ भाइयों से खुली मुलाकात कराने की मांग कर रही थी। जेल प्रबंधन फोन के जरिए महिलाओं की बात भाइयों से कराने की बात कह राह था लेकिन महिलाएँ नही मान रही थी। स्थिति को देखते हुए एसडीएम वीरेंद्र सिंह बघेल मौके पर पहुंचे और महिलाओं को समझाइश दी।
शासन के निर्देशानुसार महिलाओं की फोन के जरिए बंदियों से मुलाकात कराई जा रही है। महिलाएं बंदियों से खुली मिलाई की बात कर रही है। एसडीएम साहब आ गए है। महिलाओं कों समझने की कोशिश की जा रही है।
ममता नार्वे
जेलर सर्किल जेल दतिया
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Gaurav Sharma
निदेशक और संपादक
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →

