Subhash Chandra Bose 125th Jayanti: मध्यप्रदेश में भी गुमनामी में जीवन जी रहा नेता जी से जुड़ा परिवार

Subhash Chandra Bose 125th Jayanti: मध्यप्रदेश में भी गुमनामी में जीवन जी रहा नेता जी से जुड़ा परिवार

देवास/बागली,सोमेश उपाध्याय| आज पूरा देश स्वातंत्र्य समर के महान योद्धा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose) की 125 वी जयन्ती मना रहा है। भारत सरकार (Indian Government) ने आज के दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का एलान भी किया है। वही नेता जी से जुड़ा एक परिवार देवास (Dewas) जिले की बागली (Bagli) तहसील में भी निवासरत है। यहां के निवासी स्व.सरदार तीरथ सिंह रिन नेताजी की आजाद हिंद फौज में एंटी टैंक कमांडर थे।

सरदार रिन ने नेताजी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्ती भूमिका निभाई। लेकिन वे स्वयं तो आजादी के बाद भी गुमनामी भरा जीवन व्यतीत करते रहे। वे सादगीपसंद, स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने कभी भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। विपरीत परिस्थितियों में अपने संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए ट्रक ड्रायवरी की। बागली में सम्मान के रूप में केवल एक छोटा सा स्मारक बना दिया गया। जीवन पर्यंत गुमनामी भरा जीवन जीने के बाद 12 अगस्त 1992 को बागली में ही उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन आज तक उनके परिवार को वो सम्मान नही मिला जिसके वे हकदार थे।

उनके परिवार में वर्तमान में उनकी पुत्रवधू कुलदीप कौर रिन सहित पौत्र व अन्य परिवार के सदस्य है। बागली में उनके निवास को आज भी फौजी भवन के रूप में ही जाना जाता है। क्षेत्रीय लोगो की मांग है कि भारत की आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर कर चुके नेताजी के साथी स्व.सरदार तीरथ सिंह रिन के परिवार को राज्य व केंद्र सरकार द्वरा उचित सम्मान देकर उनकी स्मृति में स्मारक का निर्माण करना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी भी आजादी के नायकों से प्रेरणा ले सके।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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