सीएम डॉ. मोहन यादव आज धार जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘गंगा दशहरा कार्यक्रम’ में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धार में मां सरस्वती लोक बनाने की घोषणा की। इसी के साथ राजा भोज शोध संस्थान के निर्माण की घोषणा भी की। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले भोजशाला मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और हर्षवर्धन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने सनातन संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है।
धार में बनेगा मां सरस्वती लोक
धार जिले में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘गंगा दशहरा कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहर के विकास और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी की कृपा और आशीर्वाद से धार को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में उन्होंने धार में “मां सरस्वती लोक” विकसित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरातत्व विभाग की अनुमति से जो भी विकास कार्य संभव होंगे, उन्हें कराया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि धार को पुरातत्व, पर्यटन, साहित्य और संस्कृति का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा।
राजा भोज शोध संस्थान स्थापित होगा
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने “राजा भोज शोध संस्थान” स्थापित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि राजा भोज की विरासत, भारतीय ज्ञान परंपरा और मालवा की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए यह संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आने वाले समय में साहित्य, शोध और पर्यटन की नई राजधानी के रूप में विकसित होगा। अपने संबोधन में मुख`यमंत्री ने कहा कि “750 साल के संघर्ष के बाद यह अवसर आया है। मैं धारवासियों को बधाई देता हूं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब धार भविष्य की नई दुनिया में प्रवेश कर रहा है।” उन्होंने कहा कि न्यायालय ने “दूध का दूध और पानी का पानी” कर दिया है और अब समय धार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने “विरासत से विकास” की सोच को साकार किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में न्यायालय के निर्णयों को लागू करने का सामर्थ्य होना चाहिए और यह सामर्थ्य प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिखाई देता है।
कैलाश विजयवर्गीय ने भोजशाला आंदोलन का महत्व बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोजशाला आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला को लेकर लंबा संघर्ष हुआ, जिसमें तीन लोगों ने बलिदान दिया। उन्होंने शहीदों के परिजनों को मंच पर सम्मानित करते हुए कहा कि “भोजशाला सिर्फ शांति से नहीं मिली, इसके पीछे त्याग, तपस्या और आंदोलन की लंबी कहानी है।” उन्होंने शहीद लक्ष्मण सिंह, अंतर सिंह और बन सिंह के परिवारों का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया।






