खुले बोरवेल में गिरा मासूम, 3 घंटे चला रेस्क्यू, डिंडोरी में बाल-बाल बची बच्चे की जान

डिंडोरी के झनकी गांव में खुले बोरवेल में गिरा 10 साल का मासूम तीन घंटे तक मौत से लड़ता रहा। एक बच्चे की साइकिल की चेन उतरना उसके लिए जीवनदान बन गया। अब प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
खुले बोरवेल में गिरा मासूम, 3 घंटे चला रेस्क्यू, डिंडोरी में बाल-बाल बची बच्चे की जान

मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां 10 साल का मासूम शिवम खुले बोरवेल में गिर गया और करीब तीन घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच फंसा रहा।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अगर वहां से गुजर रहे एक बच्चे की साइकिल की चेन नहीं उतरती, तो शायद किसी को भी शिवम के बोरवेल में गिरने का पता नहीं चलता। यही छोटी सी घटना मासूम की जिंदगी बचाने की वजह बन गई।

कैसे हुआ डिंडोरी बोरवेल हादसा?

यह पूरा मामला डिंडोरी जिले के करंजिया विकासखंड के झनकी गांव का है। गांव के पास सड़क किनारे एक पुराना बोरवेल खुला पड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि उसी बोरवेल में शिवम की कुदाल गिर गई थी।

मासूम कुदाल निकालने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे बोरवेल में जा गिरा। घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, इसलिए किसी को भी हादसे की जानकारी नहीं मिल सकी।

साइकिल की चेन उतरना बना जीवनदान

इस घटना का सबसे भावुक हिस्सा वही है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, उसी रास्ते से एक बच्चा साइकिल से गुजर रहा था। अचानक उसकी साइकिल की चेन उतर गई। वह सड़क किनारे रुककर चेन ठीक करने लगा। तभी उसकी नजर खुले बोरवेल के अंदर गई। जब उसने अंदर देखा तो शिवम मदद के लिए आवाज लगा रहा था। यह देखकर बच्चा घबरा गया और तुरंत गांव की तरफ दौड़ा। उसने ग्रामीणों को पूरी घटना की जानकारी दी।

ग्रामीणों ने शुरू किया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर बच्चे को बचाने की कोशिश शुरू की। ग्रामीण थानसिंह कुंजाम ने अपनी जान जोखिम में डालकर बोरवेल के अंदर उतरने की कोशिश की। रस्सियों और स्थानीय संसाधनों की मदद से रेस्क्यू शुरू किया गया। करीब तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार शिवम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के बाहर आते ही गांव में राहत की सांस ली गई।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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