गरीब परिवारों की मदद के लिए किन्नर समाज ने बढ़ाए हाथ

गरीब परिवारों की मदद के लिए किन्नर समाज ने बढ़ाए हाथ

डिंडौरी। प्रकाश मिश्रा। जहां एक तरफ पूरा देश कोरोना की महामारी से जूझ रहा है इसी वैश्विक महामारी से बचाओ की जंग में हर कोई आगे बढ़कर आर्थिक रूप से देश का सहयोग कर रहा है ऐसे में ही समाज के एक हाशिए पर पड़े किन्नर समाज ने आपदा की इस घड़ी में गरीब परिवारों की मदद के लिए अपने भंडार खोल दिए हैं ।

पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के चलते लॉक डाउन के कारण रोजाना मजदूरी कर अपना भरण-पोषण करने वाले मजदूर गरीब और बेसहारा लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है ऐसे समय में समाज के हाशिए पर गिने जाने वाला किन्नर समाज ऐसे परिवारों की मदद करने का बीड़ा उठाया है। जिला मुख्यालय में रहने वाले किन्नर समाज के लोगों ने इस भयावह त्रासदी के समय गरीब परिवारों की मदद करते हुए अनाज फल और वस्त्र बांटकर मुसीबत की इस घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया है।

बता दें कि जिला मुख्यालय में किन्नर गुरु नाज़नीन बाजी के सानिध्य में किन्नर समाज निवास करता है। नाजनीन बाजी ने अपने सहयोगियों के साथ नगर के विभिन्न वार्डों में घूम घूम कर जरूरतमंद लोगों को अनाज फल वस्त्र बांटकर मदद पहुंचाई है। नाज़नीन बाजी की माने तो अभी तक वे लगभग 1200 लोगों को मदद के पैकेट पहुंचा चुकी है। किन्नर गुरु ने कहा कि उन्हें बहुत दुख है कि आज भी समाज में गरीब और बेसहारा लोग हैं उन्होंने कहा कि उनकी छोटी-छोटी मदद कर उन्हें अत्यंत खुशी महसूस हो रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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