डिंडौरी में गणतंत्र दिवस पर मंत्री ओमकार मरकाम ने किया ध्वजारोहण

डिंडौरी में गणतंत्र दिवस पर मंत्री ओमकार मरकाम ने किया ध्वजारोहण

डिंडौरी।प्रकाश मिश्रा ।
जिला मुख्यालय के पुलिस परेड ग्राउंड में गणतंत्रदिवस समारोह भव्यता पूर्वक आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक की सलामी के बाद निर्धारित समय पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मध्यप्रदेश सरकार के कवीनेट मंत्री ओमकार मरकाम ने ध्वजारोहण किया।ध्वजारोहण के दौरान जिला कलेक्टर बी कार्तिकेयन, पुलिस अधीक्षक एम एल सोलंकी, जिला पंचायत सी ओ एम एल वर्मा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे, नगर परिषद अध्यक्ष पंकज सिंह तेकाम भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत सहित अधिकारी कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। ध्वजारोहण के ठीक बाद मंत्री मरकाम ने रक्षित निरीक्षक संध्या ठाकुर के नेतृत्व में परेड का निरीक्षण किया। साउंड सिस्टम के साथ मध्यप्रदेश गान सम्पन्न कराया गया।विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के छात्रों ने पी टी का प्रदर्शन किया।इसी बीच स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों को शाल श्री फल देकर सम्मानित किया गया।स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्र मुग्ध किया।गणतंत्र दिवस परेड में जिला पुलिस बल,जिला महिला बल,होमगार्ड बल,वन विभाग,बिसबल वाहिनी, एन सी सी ,स्काउट,सहित 21 प्लाटून शामिल हुए।गणतंत्र दिवस समारोह में विभिन्न विभागों के द्वारा झांकियों का प्रदर्शन भी किया गया।जिला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अधिकारियों एव कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए सम्मानित किया गया।सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विजेता शिक्षण संस्थाओं के बच्चों को पुरुषकारों का वितरण किया गया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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