“देशभक्ति जन सेवा स्लोगन” को चरितार्थ कर रहे पुलिस के जवान

“देशभक्ति जन सेवा स्लोगन” को चरितार्थ कर रहे पुलिस के जवान

डिंडोरी| प्रकाश मिश्रा| कोरोना वायरस से बचाव और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए यूं तो मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन कमर कसकर मुस्तैदी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है| लेकिन पुलिसिया ड्यूटी के साथ-साथ समाज सेवा का जज्बा पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों में देखने को मिल रहा है वह सराहनीय है। पुलिस विभाग के इन जांबाज योद्धाओं के द्वारा निभाई जा रही दोहरी भूमिका ने पुलिस के स्लोगन देशभक्ति और जन सेवा को पूर्णतः चरितार्थ करता हुआ दिखाई दे रहा है।

बता दें कि डिण्डोरी जिला पुलिस के द्वारा जहां समाजसेवी संस्थाओं के साथ जुड़कर हजारों जरूरतमंदों को राशन और भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है ,वही दूरदराज से आए मजदूरों को स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए साधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं । इसी कड़ी में शुक्रवार की सुबह अपनी पॉइंट ड्यूटी पर तैनात नर्मदा पुल के पास हेड कांस्टेबल अशोक कुमार और उनके साथी पुलिसकर्मियों ने बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को अनाज का वितरण किया ।कहा जाता है कि मन में यदि सेवा का भाव हो तो ड्यूटी चाहे किसी भी रुप में हो जनसेवा में बाधक नहीं बनती।

अशोक कुमार पुलिस की नौकरी में आने से पहले एन जी ओ के माध्यम से भी समाज के पिछड़े वर्गों की सेवा का कार्य सतत करते रहे हैं और नौकरी में आने के बाद भी मन में सेवा का वह भाव बना रहा जिसके चलते आज भी जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं। अशोक कुमार का कहना है कि वह एक छोटे से कर्मचारी है लेकिन अपनी क्षमता के अनुरूप इस विकट परिस्थिति में जो भी जनसहयोग उनसे बन पा रहा है वह उस मदद को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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