पंचायत की क्रांति देवी ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की पोल, कहा- कलाकार A, B और C कैटेगरी में बंटे होते हैं

‘पंचायत’ फेम सुनीता राजवार ने इंडस्ट्री के अंदर चल रहे भेदभाव पर बड़ा खुलासा किया है। बताया कि बाहर से चमकदार दिखने वाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के अंदर कलाकारों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है।
पंचायत की क्रांति देवी ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की पोल, कहा- कलाकार A, B और C कैटेगरी में बंटे होते हैं

ओटीटी और टीवी की दुनिया को लोग अक्सर ग्लैमर और नाम-शोहरत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे हालात बिल्कुल अलग हैं। इसी सच्चाई को ‘पंचायत’ वेब सीरीज में क्रांति देवी का किरदार निभाने वाली सुनीता राजवार ने सामने रखा है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में कलाकारों को उनकी भूमिका और पहचान के आधार पर अलग-अलग ट्रीटमेंट मिलता है। उनके मुताबिक, लीड एक्टर्स और कैरेक्टर आर्टिस्ट्स के बीच दूरी सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह रोजमर्रा की सुविधाओं में भी दिखती है।

सुनीता राजवार ने कहा कि कई बार छोटे रोल करने वाले कलाकारों को सेट पर उतना सम्मान नहीं मिलता, जितना बड़े चेहरों को मिलता है। उन्होंने कहा कि जब कलाकार सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना चाहता है, तो ऐसे माहौल में भेदभाव उसे मानसिक रूप से भी प्रभावित करता है।

सेट पर सुविधाओं में फर्क क्यों किया जाता है?

लीड एक्टर्स के लिए अलग वैनिटी वैन, स्टाफ और आराम की पूरी व्यवस्था होती है, जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को सीमित सुविधाओं में काम करना पड़ता है। कई बार उन्हें एक ही वैनिटी वैन शेयर करनी पड़ती है या सिर्फ एक स्पॉट बॉय के सहारे काम चलाना पड़ता है।

उन्होंने यह भी बताया कि छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को कई बार खाने-पीने की लाइन में अलग रखा जाता है, जिसे इंडस्ट्री में A, B और C कैटेगरी कहा जाता है। A कैटेगरी में मुख्य कलाकार, B में सपोर्टिंग रोल और C में एक्स्ट्रा या बैकग्राउंड आर्टिस्ट आते हैं। इस सिस्टम की वजह से सेट पर एक तरह का अलगाव पैदा हो जाता है, जो काम के माहौल को भी प्रभावित करता है।

इंडस्ट्री में बराबरी की बहस फिर तेज

कहा कि यह फर्क सिर्फ सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच में भी दिखाई देता है। उनके मुताबिक, अगर कोई कलाकार लीड रोल में है तो पूरा फोकस उसी पर रहता है, जबकि छोटे किरदारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने इसे समाज के ढांचे जैसा बताया, जहां पहचान और पद के आधार पर व्यवहार बदल जाता है।

सुनीता का कहना है कि कई बार मेहनत और टैलेंट के बावजूद कलाकारों को बराबरी का सम्मान नहीं मिल पाता। हालांकि, इंडस्ट्री में अब धीरे-धीरे बदलाव की बात भी हो रही है और कई प्रोडक्शन हाउस बेहतर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी, जमीनी स्तर पर अभी भी असमानता साफ देखी जाती है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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