
बॉलीवुड फिल्मों के कलाकार जब भी किसी फिल्म में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। उसके बाद उन्हें किसी न किसी तरह के अवॉर्ड से जरूर नवाजा जाता है। कई सारे अवार्ड समारोह होते हैं जिनकी अपनी पहचान है। शोले एक ऐसी फिल्म है जो भारतीय सिनेमा की सबसे सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है। कुछ दिनों पहले ही इस फिल्म ने अपने 50 साल का सफर पूरा किया है।
गोपाल दास सिप्पी के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म को सलीम जावेद ने लिखा था। इसका डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था। 50 सालों में इसने कई सारे अवॉर्ड अपने नाम किए हैं। आज हम आपको इस फिल्म के एक ऐसे एक्टर के बारे में बताते हैं जिसे 5 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड मिला था। आपको जानकर हैरानी होगी इस एक्टर को शोले में काम करने के लिए फीस नहीं बल्कि रेफ्रिजरेटर मिला था।
5 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड
सचिन ने अपनी सफलता के किस्से बहुत छोटी उम्र में लिखने शुरू कर दिए थे। 5 साल की उम्र में उन्होंने एक्टिंग शुरू कर दी थी। 1962 में आई मराठी फिल्म ‘हा मज़ा मार्ग एकल’ में अपनी एक्टिंग के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड दिया गया था। एक्टिंग के अलावा उन्होंने कई फिल्मों का डायरेक्शन किया और पुरस्कार अपने नाम किए।
फीस में मिला था रेफ्रिजरेटर
शोले फिल्म में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को लीड कैरेक्टर के तौर पर देखा गया था। इन कलाकारों को कम करने के लिए अच्छी खासी फीस मिली थी। लेकिन एक कलाकार ऐसा था जिसे इसके तौर पर कुछ अजीब मिला था। फिल्म में उनकी अहम भूमिका थी और ऐसा बताया जाता है कि उन्हें पैसों के बदले नया रेफ्रिजरेटर दिया गया था। यह एक्टर कोई और नहीं सचिन पिलगांवकर हैं, जो चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर 65 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। हिंदी और मराठी की 50 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने काम किया है।
सचिन खुद कुछ इंटरव्यू उसमें इस बात को बता चुके हैं की शोले में उन्हें अपने किरदार के लिए पैसे की बजाय रेफ्रिजरेटर मिला था। 1970 की बात है और उसे समय रेफ्रिजरेटर एक लग्जरी आइटम हुआ करता था। इसे किसी कीमती तोहफे की तरह सोच समझ कर दिया जाता था। यह रेफ्रिजरेटर आज भी उनके लिए सबसे कीमती चीजों में से एक है जिसे उन्होंने संभाल कर रखा है।
कैसा था Sachin Pilgaonkar किरदार
शोले में सचिन पिलगांवकर की भूमिका काफी छोटी थी। वह उसे समय 17 साल के थे। कल मैं वह अंधे इमाम के बेटे अहमद की भूमिका में दिखाई दिए थे। उनके कैरेक्टर को खूंखार डाकू गब्बर सिंह ने मौत के घाट उतार दिया था। यह फिल्म का एक बहुत ही भावनात्मक मोड़ था।
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