बॉलीवुड में साउथ के कलाकारों को लेकर एक पुरानी शिकायत फिर उठ खड़ी हुई है। इस बार किसी और ने नहीं, बल्कि तमिल सिनेमा की जानी-मानी अदाकारा सिमरन ने ही मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के रवैये पर तीखा हमला बोला है। बात भी सही है, साउथ के कलाकार अक्सर कहते रहे हैं कि उन्हें बॉलीवुड में वो मान-सम्मान नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। ये कोई नई बात नहीं, लेकिन जब एक बड़ा नाम खुलकर बोलता है तो बात दूर तक जाती है।
दरअसल सिमरन का साफ कहना है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री साउथ इंडियन आर्टिस्ट्स की विरासत और उनके काम की कद्र नहीं करती। ये कोई छोटी बात नहीं, बल्कि उनके दिल का दर्द है। उनका दावा है कि बॉलीवुड में साउथ एक्टर्स और उनकी लिगेसी को इज्जत नहीं मिलती। उन्हें हमेशा इस बात का दुख रहा है कि उन्हें वो सम्मान और हक नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था। आखिर क्यों, ये सवाल तो बनता ही है। कलाकारों को उनके काम का उचित सम्मान मिलना ही चाहिए, फिर चाहे वो किसी भी इंडस्ट्री से आएं।
क्यों ठुकराई हिंदी फिल्में?
वहीं सिमरन ने फिल्मफेयर को बताया कि इसी बेकद्री के चलते उन्होंने कई हिंदी फिल्में ठुकरा दीं। उनका कहना था कि वे वहां के लोगों से खुद को जोड़ नहीं पाती थीं। उन्हें लगता था कि इन लोगों ने उनका काम देखा ही नहीं, न ही उन्हें उनकी लिगेसी का कोई पता है। भला ये कैसी बात हुई? एक कलाकार जिसने अपनी आधी जिंदगी सिनेमा को दे दी हो, और उसे ही सम्मान न मिले तो तकलीफ तो होगी ही। ये बात हर कलाकार को महसूस होती है, जब उसे अपने काम की कद्र न मिले।
सनी देओल और फिल्म मेकर ओम छंगानी की तारीफ की
लेकिन, ऐसा नहीं कि बॉलीवुड में सब एक जैसे हैं। सिमरन ने इस बातचीत में कुछ अच्छी बातें भी बताईं। उन्होंने सनी देओल और फिल्म मेकर ओम छंगानी की तारीफ की। ‘गबरू’ फिल्म में सनी देओल के साथ काम करने का उनका अनुभव अच्छा रहा। सनी देओल को उन्होंने बहुत नेक और विनम्र इंसान बताया। फिल्म के प्रोड्यूसर ओम छंगानी ने भी सेट पर उनका खूब ख्याल रखा। ‘गुलमोहर’ की टीम के साथ भी उनका अनुभव बेहतरीन रहा। तो कुछ लोग तो हैं जो कद्र करते हैं और कलाकारों को सम्मान देते हैं, ये भी एक अच्छी बात है।
1995 में ‘सनम हरजाई’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की
अब जरा सिमरन के फिल्मी सफर पर भी नजर डाल लेते हैं। उन्होंने 1995 में ‘सनम हरजाई’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। वे ‘सुपरहिट मुकाबला’ संगीत शो की प्रेजेंटर भी रही हैं। जया बच्चन उनके काम से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने सिमरन को ‘तेरे मेरे सपने’ फिल्म में कास्ट कर लिया। इस फिल्म का ‘आंख मारे’ गाना तो आज भी लोगों की जुबान पर है। तब से लेकर आज तक, सिमरन ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है।
‘इंद्रप्रस्थम’ से मलयालम सिनेमा में कदम रखा
1996 में ममूटी के साथ फिल्म ‘इंद्रप्रस्थम’ से उन्होंने मलयालम सिनेमा में कदम रखा। फिल्म भले ही फ्लॉप रही, लेकिन सिमरन की एक्टिंग को खूब सराहा गया। 1997 में ‘वन्स मोर’ और ‘वीआईपी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें तमिल सिनेमा में पहचान दिलाई। इन फिल्मों के बाद उनकी तूती साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में बोलने लगी। वे लगातार सफल फिल्में करती रहीं और अपनी एक खास जगह बनाई।
सिमरन की पॉपुलर फिल्मों की लिस्ट भी लंबी है। ‘कन्नाथिल मुथमित्तल’, ‘प्रियमानवाले’, ‘पम्मल के. संबंदम’ और ‘पंचतंत्रम’ जैसी फिल्में इसमें शामिल हैं। हाल ही में उन्हें एम. शशिकुमार के साथ ‘टूरिस्ट फैमिली’ में देखा गया था। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग को लोगों ने काफी पसंद किया। क्रिटिक्स ने भी खूब तारीफ की।






