कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर, पुरानी पेंशन योजना पर अपडेट, जानें OPS पर क्या बोले आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष

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Old Pension Scheme 2023 : आगामी चुनावों से पहले पुरानी पेंशन योजना की चर्चाएं जोरों पर है। देश के 4 राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड में पुरानी पेंशन योजना लागू होने के बाद अब कांग्रेस की नवनिर्वाचित सरकार की हिमाचल प्रदेश में ओपीएस को बहाल करने की तैयारी है । इसी बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया (Montek singh Ahluwalia) का एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर बड़ा बयान सामने आया है।

पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने राज्य सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन योजना को वापस लाना एक प्रतिगामी कदम हो सकता है और वित्तीय दिवालियापन की ओर ले जा सकता है। देश और दुनिया आज जिन आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, उसे देखते हुए इसे लाने का कदम एक ‘बेतुका विचार’ हो सकता है। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि ओपीएस राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले सबसे बड़े सेस में से एक है। विशेष रूप से, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्सर राजनीतिक दलों के स्वतंत्र लगाम की संस्कृति को विकसित करने और बढ़ावा देने के खिलाफ बात की थी।

पहले भी दे चुके है बड़ा बयान

इससे पहले पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया का एक और बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को वापस लाना सबसे बड़ी ‘रेवड़ियों’ में से एक होगा। पुरानी पेंशन योजना को यद‍ि वापस लाया जाता है तो यह सरकार की सबसे बड़ी ‘रेवड़ियों’ में से एक होगा। पीएम मोदी ने रेवड़ी (फ्री ग‍िफ्ट) को लेकर सही कहा है। हर कोई राजकोषीय घाटे को कम करने की बात करता है लेकिन कोई भी निश्चित व्यय से छुटकारा पाने सॉलिड उपाय नहीं ढूंढता है। हमें अमेरिका या यूरोप में मंदी है या नहीं, इस बात पर ध्यान देने के बजाय भारतीय अर्थव्यवस्था को 8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की जरूरत है।

ऐसे समझें OPS और NPS में अंतर

  • पुरानी पेंशन योजना के तहत सरकार द्वारा कर्मचारियों-पेंशनरों को पूरी पेंशन राशि दी जाती थी, इसे 1 अप्रैल 2004 से बंद कर दिया गया था।
  • नई योजना के अनुसार, देश में 1 जनवरी 2004 से NPS यानी नई पेंशन स्कीम लागू है कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10 प्रतिशत पेंशन में योगदान करते हैं, जबकि राज्य सरकार 14 प्रतिशत का योगदान करती है।
  • OPS के तहत रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी के वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है, क्योंकि पुरानी स्‍कीम में पेंशन का निर्धारण सरकारी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी और महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसार होता है।
  • पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा कटने का प्रावधान नहीं है। पुरानी पेंशन योजना में भुगतान सरकार की ट्रेजरी के माध्यम से होता है।
  • पुरानी पेंशन स्कीम में 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी की रकम मिलती है, रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को पेंशन की राशि मिलती है।
  • सबसे खास बात पुरानी पेंशन स्कीम में हर 6 महीने बाद मिलने वाले DA का प्रावधान है, यानी जब सरकार नया वेतन आयोग (Pay Commission) लागू करती है, तो भी इससे पेंशन (Pension) में बढ़ोतरी होती है।
  • पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी, NPS में कर्मचारियों की सैलरी से 10% की कटौती की जाती है।पुरानी पेंशन योजना में GPF की सुविधा होती थी, लेकिन नई स्कीम में इसकी सुविधा नहीं है।
  • पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी, जबकि नई पेंशन योजना में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है।
  • पुरानी पेंशन एक सुरक्षित योजना है, जिसका भुगतान सरकारी खजाने से किया जाता है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है, जिसमें बाजार की चाल के अनुसार भुगतान किया जाता है।
  • NPS पर रिटर्न अच्‍छा रहा तो प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) और पेंशन (Pension) की पुरानी स्कीम की तुलना में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अच्छी राशि भी मिल सकती है।  ये शेयर बाजार पर निर्भर रहता है. लेकिन कम रिटर्न की स्थिति में फंड कम भी हो सकता है।
Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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