
Meaning of the demand to remove the ban on transfers : तबादलों का मौसम यानी सियासी गलियारों में बसंत का आना। तबादलों का खुलना यानी जाने कितने लोगों की चांदी कटना। तबादला करना कराना यानी कुछ लेना कुछ देना। यही वजह है कि दो दिन पहले कैबिनेट की बैठक में कुछ मंत्रियों ने तबादले पर लगी रोक हटाने की मांग की है। अब इस मांग के मायने तो सभी समझते हैं..और जो चुनावी साल हो तो इसके कई अलग अलग फायदे भी होते हैं।
फिलहाल तबादलों पर लगी रोक बरकरार है। इसलिए भी वही सिस्टम चल रहा है.. मंत्री के यहां से सीएम कॉर्डिनेशन में फाइल जाती है। लेकिन मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग में कई मंत्रियों ने कहा कि तबादलों से बैन हटना चाहिए। उन्होने कहा कि अभी कई लोगों को तबादले की जरुरत है और एक तय समय सीमा के लिए बैन खुले और फिर बंद कर दिया जाए। ज़ाहिर सी बात है कि मिशन 2023 के लिए हर मंत्री पूरी तरह मजबूत हो जाना चाहता है। चुनावी साल है तो नेताओं-मंत्रियों को जनता के सामने जाना है और जीतना भी है। चुनाव की शतरंज में प्यादों और मोहरों को अपने हिसाब से जमाना भी है, ताकि मनमाफिक काम करवाने की गुंजाइश बनी रहे। सब चाहते हैं कि अपने अपने पसंदीदा अधिकारियों को अपने इलाके में बुलवा लिया जाए।
इसी के साथ तबादले यानी लेनदेन। ये कोई सस्ता खेल नहीं है। जितनी अच्छा पद उतने अच्छे दाम। ट्रांसफर के मौसम में हजारों करोड़ का खेल चलता है। ये बाकायदा किसी बड़े बिजनेस की तरह है और ट्रांसफर सीजन में ही कई लोग इतना कमा लेते हैं कि उनके बाकी सारे मौसम अच्छे से गुजर जाते हैं। जब तबादले शुरु होते हैं तो इच्छित पोस्ट के लिए बोलियां भी लगती हैं और तमाम तिकड़म आज़माई जाती है। ये बात हालांकि किसी से छुपी हुई नही है लेकिन अब जब तबादलों से बैन हटाने की मांग उठी है तो ये सारी बातें भी एक बार फिर दोहराने का सबब बन गया है। इस मुद्दे पर सागर मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सर्वेश जैन ने क्या खूब कहा है। इस मांग के साथ ही उनकी ये बात सुनना लाज़मी है।
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पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

