Teacher Recruitment : लाखों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण खबर, भरे जाएंगे रिक्त पद, जानें प्रक्रिया

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। प्रदेश में जल्दी शिक्षकों की भर्ती (Teacher Recruitment) की जाएगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दरअसल कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक की भर्ती ना होने की वजह से कई स्कूल शिक्षक विहीन हो गए। प्रदेश में शासकीय स्कूल के शिक्षकों को गांव में 10 साल तक गांव में पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के रिक्त पड़े स्कूलों में 70% पद भरे जाएंगे। इससे शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया पूरी होगी।

दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नवीन स्थानांतरण नीति में उल्लेख किया गया है कि शासकीय स्कूल के शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल में भी पढ़ाना होगा। इससे पहले स्थानांतरण प्रक्रिया में ग्रामीण क्षेत्रों से कई शिक्षक शहरी क्षेत्र में आ गए। जिससे अब शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की अतिशेष संख्या बढ़ गई लेकिन शिक्षकों के स्थानांतरण सुरक्षित नहीं होंगे।

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परफॉर्मेंस के आधार पर उनके स्थानांतरण किए जाएंगे। वहीं अब नई नीति के तहत नवनियुक्त शिक्षकों को अपने पूरे सेवाकाल में गांव में 10 साल पुराना होगा। वही नवनियुक्त शिक्षकों को 3 साल तक गांवों के स्कूलों में रहना अनिवार्य किया गया है। नवीन नीति के तहत सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट मॉडल स्कूल के साथ हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल के परिणाम 60% से कम होते हैं और अन्य हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल में परिणाम 40% से कम होते हैं तो प्राचार्य का तबादला ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाएगा।

लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक केके द्विवेदी की माने तो इस नीति में उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों को 10 साल पढ़ाना होगा। इससे गांव के स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध होंगे। इसके अलावा नई नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापना के लिए अवधि निर्धारित की गई है। 2001 तक नियुक्त शिक्षक और संविदा शिक्षकों 5 साल तक क्षेत्रों में पदस्थ किया जाएगा। इसके अलावा 2008 तक नियुक्त हुए संविदा शिक्षक को 7 वर्ष तक अपनी सेवा देनी होगी।

2013 में नियुक्त हुए संविदा शिक्षक को 10 साल जबकि 2018 तक नियुक्त संविदा शिक्षक को 10 साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देना अनिवार्य होगा। वही नियुक्ति के बाद शहरी क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे शिक्षकों को अब गांव में पढ़ाना होगा। दूरस्थ और राम के आदिवासी इलाके में जाने वाले शिक्षकों को इंसेंटिव भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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