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गुजरात विधानसभा में पारित हुआ 12 घंटे की शिफ्ट वाला संशोधन विधेयक, कांग्रेस-आप का जोरदार विरोध

Written by:Neha Sharma
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गुजरात विधानसभा ने सोमवार को भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच कारखाना (गुजरात संशोधन) विधेयक 2025 को बहुमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के तहत अब औद्योगिक कार्य पाली को मौजूदा नौ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन कर दिया गया है।
गुजरात विधानसभा में पारित हुआ 12 घंटे की शिफ्ट वाला संशोधन विधेयक, कांग्रेस-आप का जोरदार विरोध

गुजरात विधानसभा ने सोमवार को भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच कारखाना (गुजरात संशोधन) विधेयक 2025 को बहुमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के तहत अब औद्योगिक कार्य पाली को मौजूदा नौ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन कर दिया गया है। इसके अलावा, महिलाओं को भी पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक रात्रि पाली में काम करने की अनुमति दी गई है। जुलाई में जारी अध्यादेश की जगह लाने वाला यह बिल भाजपा विधायकों के समर्थन से पास हुआ, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने इसका जोरदार विरोध किया।

विधानसभा में बिल पेश करते हुए उद्योग मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने कहा कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य गुजरात में निवेश और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि इसके जरिये राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राजपूत ने यह भी स्पष्ट किया कि काम के घंटे भले ही 12 प्रतिदिन हो जाएं, लेकिन सप्ताह में कुल कार्य घंटे 48 से कम ही रहेंगे। इसका मतलब यह होगा कि यदि कोई श्रमिक चार दिन 12 घंटे काम करता है और 48 घंटे पूरे कर लेता है, तो शेष तीन दिन उसे सवेतन अवकाश मिलेगा।

12 घंटे की शिफ्ट वाले विधेयक को दी मंजूरी

हालांकि कांग्रेस ने इस विधेयक को श्रमिकों के हितों के खिलाफ बताया। कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि सरकार श्रमिकों का शोषण करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भी मजदूरों से नौ घंटे की बजाय 11 से 12 घंटे तक काम कराया जाता है। अगर नियम में बदलाव कर 12 घंटे कर दिया गया तो मजदूरों को 13 से 14 घंटे तक काम करना पड़ेगा। मेवाणी ने यह भी कहा कि यह सरकार के उस दावे के बिल्कुल उलट है जिसमें वह मजदूरों के वित्तीय सशक्तीकरण की बात करती है।

इसी तरह आप विधायक गोपाल इटालिया ने भी इस संशोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून मजदूरों के नहीं बल्कि कारखाना मालिकों के हित में लाया गया है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस तरह का अध्यादेश लाने की क्या आपात स्थिति थी? क्या मजदूरों या किसी यूनियन ने सरकार से काम के घंटे बढ़ाने की मांग की थी? इटालिया ने चेतावनी दी कि नौकरी सुरक्षा के ठोस प्रावधान के बिना सहमति का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि यदि मजदूर 12 घंटे काम करने से इनकार करेंगे तो उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है।

विधानसभा में भारी बहस और विपक्षी दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आखिरकार भाजपा बहुमत के बल पर इस विधेयक को पारित कराने में सफल रही। अब गुजरात में फैक्ट्रियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों को प्रतिदिन 12 घंटे की शिफ्ट करनी होगी, हालांकि सरकार का दावा है कि यह बदलाव श्रमिकों के साथ-साथ उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह संशोधन मजदूरों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और आजीविका पर गंभीर असर डालेगा।