Hindi News

गुजरात में पार-तापी-नर्मदा रिवर लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का बड़ा प्रदर्शन, श्वेतपत्र की मांग तेज

Written by:Neha Sharma
Published:
दक्षिण गुजरात के आदिवासी समुदाय ने एक बार फिर पार-तापी-नर्मदा रिवर लिंक परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस से जुड़े आदिवासी विधायकों के आह्वान पर शनिवार को वलसाड जिले के धरमपुर में आदिवासी समुदाय के लोग जुटे।
गुजरात में पार-तापी-नर्मदा रिवर लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का बड़ा प्रदर्शन, श्वेतपत्र की मांग तेज

दक्षिण गुजरात के आदिवासी समुदाय ने एक बार फिर पार-तापी-नर्मदा रिवर लिंक परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस से जुड़े आदिवासी विधायकों के आह्वान पर शनिवार को वलसाड जिले के धरमपुर में आदिवासी समुदाय के लोग जुटे। बिरसा मुंडा चौक पर आयोजित इस सभा में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस योजना को पूरी तरह बंद करने और इस पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह परियोजना उनके क्षेत्र और परंपराओं को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इसे स्थायी रूप से रद्द किया जाए।

आदिवासियों का बड़ा प्रदर्शन

इस रिवर लिंक परियोजना का विचार पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सामने आया था। हालांकि, अब यह मामला भाजपा सरकार के लिए चुनौती बन गया है। हाल ही में भाजपा के एक सांसद द्वारा राज्यसभा में इस परियोजना से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के बाद आदिवासी समुदाय में नाराजगी और बढ़ गई। जबकि गुजरात सरकार ने वर्ष 2022 में ही इस योजना को स्थगित करने का निर्णय लिया था। राज्य के कैबिनेट मंत्री ऋषीकेश पटेल ने दोहराया कि सरकार आज भी इस परियोजना को स्थगित रखने के अपने फैसले पर कायम है।

स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले, विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी और विधायक अनंत पटेल ने धरमपुर में इस विरोध रैली का आयोजन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से स्पष्ट श्वेतपत्र जारी करने की मांग की, ताकि यह साफ हो सके कि सरकार भविष्य में इस परियोजना को लागू करने का कोई प्रयास नहीं करेगी। उनका कहना था कि मौखिक आश्वासनों से अब समुदाय का भरोसा नहीं बन पा रहा, इसलिए लिखित और आधिकारिक घोषणा जरूरी है।

इस रैली में गुजरात के कई जिलों से आदिवासी पुरुष और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए। अनुमान है कि राज्य के करीब एक दर्जन जिलों में आदिवासी समुदाय का निवास है, जो अपनी भूमि, जलस्रोतों और परंपराओं को लेकर बेहद सजग हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

Neha Sharma
लेखक के बारे में
A Passionate Digital News writer with deep expertise. Doing Sharp analysis with engaging storytelling. View all posts by Neha Sharma
Follow Us :GoogleNews