
गुजरात की हीरा नगरी सूरत में स्वतंत्रता दिवस पर एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ। आज़ादी के बाद से “पाकिस्तान मोहल्ला” के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्र को नया नाम मिला। सूरत के रांदेर इलाके के रामनगर स्थित इस मोहल्ले का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर “हिन्दुस्तानी मोहल्ला” कर दिया गया। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी की मौजूदगी में नए नाम का बोर्ड लगाया गया। इस मौके पर स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अब इलाके के निवासी अपने सभी दस्तावेजों से ‘पाकिस्तान मोहल्ला’ शब्द हटवाने के लिए उत्साहित हैं और सोमवार से आधार सहित अन्य दस्तावेजों को अपडेट कराने के लिए आवेदन शुरू करेंगे।
सूरत के पाकिस्तान मोहल्ले का नाम बदला
इस मोहल्ले के नाम की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन से जुड़ी है। 1947 के बाद जब सिंधी शरणार्थी सूरत में आकर बसे, तो उन्होंने रामनगर नाम से लगभग 600 घरों की एक कॉलोनी बनाई। समय के साथ इस कॉलोनी का एक हिस्सा “पाकिस्तान मोहल्ला” नाम से प्रचलित हो गया। पहले भी इस नाम को बदलने की कोशिश हुई थी और मोहल्ले के आंतरिक चौराहे का नाम ‘हेमू कलानी चौक’ रखा गया था, लेकिन वह ज्यादा प्रसिद्ध नहीं हो पाया। बाद में पूर्णेश मोदी ने नगर निगम में प्रस्ताव रखा कि इस क्षेत्र का नाम पाकिस्तान मोहल्ला से बदलकर हिन्दुस्तानी मोहल्ला किया जाए, जिसे मंजूरी मिल गई।
विधायक पूर्णेश मोदी ने कहा कि इस बदलाव से अब पाकिस्तान मोहल्ला नाम पूरी तरह इतिहास बन जाएगा। उन्होंने निवासियों की सुविधा के लिए आधार अपडेट कैंप की शुरुआत भी कर दी है। इसी कैंप में एक महिला का आवेदन स्वीकार करके उनके आधार कार्ड में नया नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मोदी ने घोषणा की कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों से पुराने नाम को हटाने के लिए प्रशासनिक सहायता दी जाएगी, ताकि किसी भी नागरिक के कागज़ पर अब पाकिस्तान मोहल्ला का नाम न बचे।
स्थानीय लोग भी इस पहल से खुश दिखाई दिए। उनका कहना है कि अब उन्हें अपने पते के कारण असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। नया नाम “हिन्दुस्तानी मोहल्ला” क्षेत्र की पहचान को सकारात्मक रूप देगा और आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम का संदेश भी देगा। इस तरह 79वें स्वतंत्रता दिवस पर सूरत के इस इलाके को नई पहचान मिली है।
