अभा जनवादी महिला समिति ने सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, 17 सूत्रीय मांगें शामिल

अभा जनवादी महिला समिति ने सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, 17 सूत्रीय मांगें शामिल

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| कोरोना महामारी के चलते देशभर में जारी लॉक डाउन के कारण आम जनता , मजदूर, किसान, महिलाएं, छात्र आदि बहुत परेशान हैं। इन्हीं लोगों की परेशानी को देखते हैं अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने अपने ज्ञापन में कहा कि एक तरफ मजदूर बड़ी संख्या में भूख के कारण पलायन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ शहर की गरीब जनता तक भी पर्याप्त राशन नहीं पहुंच रहा है जो छात्र पढ़ाई के कारण हॉस्टल एवं किराए से रह रहे हैं उनके सामने भी भोजन की बहुत बड़ी समस्या है ट्रांसपोर्ट बंद होने के कारण ना तो वह अपने घर जा सकते हैं ना ही उनके पास इतने पैसे हैं कि वह राशन व अन्य जीवन उपयोगी वस्तुएं खरीद पाए इसके अलावा महिलाओं पर भी शोषण की घटनाएं इस लॉक डाउन में बढ़ी है हम देखते हैं कि सीएए, एनआरसी, एनपीआर को लेकर जो महिलाएं आंदोलन कर रही थी उनकी गिरफ्तारी की लगातार खबरें आ रही हैं लॉक डाउन में आंदोलनकारियों को इस प्रकार गिरफ्तार कर प्रताड़ित करना निंदनीय है । एडवा के राष्ट्रीय आह्वान पर ऐसे तमाम सवालों को लेकर आज अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ग्वालियर इकाई द्वारा मोहल्ले,बस्ती में लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए प्रदर्शन कर 17 सूत्रीय मांगों के साथ जिलाधीश को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में संगठन की जिलासचिव प्रीति सिंह,जिला अध्यक्ष रीना शाक्य,जिला समिति सदस्या कांता राजौरीया ,सुनीता गौतम शामिल थी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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