छात्रों ने की ऑनलाइन सवर्दलीय बैठक, चीन को दिया कड़ा मैसेज

छात्रों ने की ऑनलाइन सवर्दलीय बैठक, चीन को दिया कड़ा मैसेज

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| दुश्मन देश चीन द्वारा भारत के विरुद्ध की जा रही हरकतों से जितनी हमारे देश की सरकार चिंतित है और चीन को मुँह तोड़ जवाब दे रही है वैसे ही अब देश का युवा भी आगे आ रहा है। इसका एक बड़ा उदाहरण ग्वालियर में देखने को मिला जहाँ छात्रों ने ऑन लाइन मॉक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जिसमें फैसला किया गया कि सब को इस समय प्रधानमंत्री के हाथ मजबूत करना है और चीन की साजिशों का पर्दा फ़ाश करना है।

शहर की संस्था विद्याधन फाउंडेशन के सदस्यों ने सर्वदलीय बैठक एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक आयोजित की। ऑन लाइन मॉक ड्रिल की तर्ज पर आयोजित बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में मप्र हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी मौजूद थे साथ ही संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता राकेश सिंह भदोरिया और संस्था सचिव मानवर्धन सिंह तोमर एवं उनके साथ समस्त टीम विशेष रूप से मौजूद थी । इस मॉक बैठक में 70 प्रतिभागियों ने अपने मुद्दे रखे। जिसके बाद सर्वदलीय बैठक में निर्णय हुआ कि देश में चल रही समस्या में चीन का इतना बड़ा हाथ है जिसको रोकने के लिए सभी पार्टी के लोग एक होकर प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर अभियान को आगे बढ़ाएंगे वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में प्रतिभागियों ने यह माना लोगों के चेहरे के रंग से किसी चीज का निर्णय नहीं लिया जा सकता अब अगर कोई देश इस प्रकार की हरकतें करेगा तो उसको संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत कई मुश्किल सहन करनी पड़ सकती हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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