डीन पर हमले के विरोध में हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर, बोले- हम असुरक्षित, कैसे काम करें? घटना की जांच की मांग

ग्वालियर JUDA अध्यक्ष डॉ धुआराम गुर्जर ने कहा हम बस सभी डॉक्टर्स की सुरक्षा चाहते हैं अब ये ग्वालियर प्रशासन तय करे कि ये उसे कैसे देनी है, क्योंकि हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, इस माहौल में हम कैसे काम करेंगे?
Gwalior Junior Doctors' Strike

Gwalior Junior Doctors’ Strike

ग्वालियर में पिछले दिनों जी आर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ पर हुये हमले के विरोध में अज जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे, उन्होंने सभी विभागों की ओपीडी बंद रखी केवल इमरजेंसी सेवाएं चालू रखीं , डॉक्टर्स ने कहा जब हमारे डीन ही सुरक्षित नहीं हैं तो हम डॉक्टर्स कैसे सुरक्षित होंगे, हड़ताली डॉक्टर्स ने स्थाई पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग दोहराई।

गजराराजा मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत जूनियर डॉक्टर्स ने आज कलमबंद हड़ताल की, उन्होंने कॉलेज के गेट पर धरना दिया अपन विभागों में काम नहीं किया ओपीडी बंद रखी केवल इमरजेंसी में मरीजों को देखा और उनका इलाज किया, डॉक्टर्स की हड़ताल की सूचना पर डीन डॉ आरके एस धाकड़ उनसे मिलने पहुंचे और इस बात की समझाइश देने का प्रयास किया कि घटना करने वाला पुलिस ने पकड लिया है तो हड़ताल वापस ले लें लेकिन डॉक्टर्स नहीं माने।

हड़ताली डॉक्टर्स ने मांगी पुलिस सुरक्षा 

डॉक्टर्स से मिलने के लिए सीएसपी रोबिन जैन भी पहुंचे उन्होंने आरोपी मनोज शर्मा पर की गई पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी और भरोसा दिया कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो इसका ध्यान रखा  जायेगा।  डॉक्टर्स ने कहा जब हमारे डीन पर हमला हो सकता है तो हम पर भी हो सकता है उन्होंने पिछले दिनों हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए सुरक्षा की मांग की।

डॉक्टर बोले – हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे

ग्वालियर JUDA अध्यक्ष डॉ धुआराम गुर्जर ने कहा हम बस सभी डॉक्टर्स की सुरक्षा चाहते हैं अब ये ग्वालियर प्रशासन तय करे कि ये उसे कैसे देनी है, क्योंकि हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, इस माहौल में हम कैसे काम करेंगे? डॉ गुर्जर ने अस्पताल में स्थाई पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की साथ ही डीन डॉ धाकड़ पर हमले की कड़े शब्दों में निंदा की उन्होंने इसलिए निष्पक्ष जाँच की मांग की।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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