कोरोना वायरस: दुकानदार दिखा रहे समझदारी, दुकान के सामने लगाए गोले जिससे ना लगे भीड़

कोरोना वायरस: दुकानदार दिखा रहे समझदारी, दुकान के सामने लगाए गोले जिससे ना लगे भीड़

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की जा रही सोशल डिस्टेंसिंग की अपील का अब शहर के लोगों पर असर होने लगा है। दुकानदार अपनी दुकान के सामने सड़क पर गोले लगा रहे हैं और ग्राहकों से कह रहे हैं कि जो सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन करेगा उसे सामान नहीं मिलेगा।

पूरे देश में घोषित किये गए 21 दिन के लॉक डाउन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल डिस्टेंस मेंटेन रखने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान देने की बात कही थी। इधर ग्वालियर जिला प्रशासन ने भी लॉक डाउन की अवधि में शहर के लोगों से घर में रहने और बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की अपील की है। पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि कोरोना से बचाव का बहुत अच्छा तरीका सोशल डिस्टेंसिंग है। क्योंकि जब लोग एक दूसरे से एक से डेढ़ मीटर की दूरी बनाकर रखेंगे तो संक्रमण नहीं फैलेगा। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ प्रशासन की ही नहीं समाज और आम जनता की भी जिम्मेदारी है कि वो सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाये और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करे।

प्रधानमंत्री और जिला प्रशासन की बात का असर भी दिखाई दे रहा है। आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को दिनभर खोलने के आदेश के बाद अब दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने सड़क पर गोले बनाने शुरू कर दिये हैं और ग्राहकों से लाइन लगाकर इन गोलों पर खड़े रहने का निवेदन करना शुरू कर दिया है। दुकानदार साफ का रहे हैं कि जो इस नियम का पालन नहीं करेगा उसे सामान नहीं मिलेगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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