अच्छी खबर, अब किसानों को लम्बी लाइन से नहीं लगना पड़ेगा, “ई-टोकन प्रणाली” से हो रहा है खाद वितरण

“ई-विकास प्रणाली” के नाम से लागू की गई खाद वितरण की इस व्यवस्था से किसानों को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिली है। साथ ही बिचौलियों की भूमिका और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगा है।
fertilizer distribution

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किसानों के लिए अच्छी खबर है अब उन्हें खाद के लिए लम्बी लम्बी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा, धक्के नहीं खाने पड़ेंगे इसकी वजह ये है कि राज्य शासन द्वारा लागू की गई ई-विकास प्रणाली अर्थात ई-टोकन से खाद (रासायनिक उर्वरक) का वितरण व्यवस्था शुरू की गई है, ग्वालियर जिले में सोमवार को इसी व्यवस्था के तहत खाद का वितरण किया गया।

सोमवार को ग्वालियर में पुतली घर के समीप स्थित मुरार विकासखंड के राज्य सहकारी विपणन संघ भण्डारण केन्द्र पर किसानों को ई-टोकन के माध्यम से खाद वितरित किया गया। इसी तरह विकासखंड भितरवार के अंतर्गत अब तक 72 किसानों को इस प्रणाली से खाद्य उपलब्ध कराया जा चुका है। कलेक्ट रुचिका चौहान ने कृषि, सहकारिता व विपणन संघ के अधिकारियों सहित जिले के सभी एसडीएम को प्रभावी ढंग से ई-टोकन प्रणाली व्यवस्था के तहत खाद वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

लम्बी लाइन और बिचौलियों से मिली मुक्ति 

“ई-विकास प्रणाली” के नाम से लागू की गई खाद वितरण की इस व्यवस्था से किसानों को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिली है। साथ ही बिचौलियों की भूमिका और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगा है। इस व्यवस्था की यह भी खूबी है कि सरकार को उर्वरक की मांग तत्काल पता लग जाती है और जरूरत के मुताबिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।

किसान के लिए बहुत सुविधाजनक है ई-टोकन व्यवस्था 

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उप संचालक रणवीर सिंह जाटव ने बताया कि ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था के तहत किसानों को खाद वितरित करने के लिये डिजिटल टोकन उपलब्ध कराया जाता है। टोकन में किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार व मात्रा, वितरण केन्द्र एवं निर्धारित तिथि व समय अंकित रहता है। यह टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। ई-टोकन के आधार पर जिले के किसान निर्धारित समय पर संबंधित वितरण केन्द्र से उर्वरक प्राप्त कर रहे हैं।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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