सुशील खरे/रतलाम। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के संकेत दो महीने पहले ही दे दिये थे। वो तब रतलाम में खेल चेतना मेले के शुभारंभ के अवसर पर आए थे। यहां उन्होने प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी को चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकार की चापलूसी करना छोड़ दे पता नही किस दिन निजाम बदल जायेगा ,वक्त का कोई ठिकाना नहीं है, ऐसे में बाद में उनकी जो दुर्गति होगी उसकी कल्पना अभी से कर लें। फिर कोई नौकरी करने लायक नही रहेंगे। भार्गव रतलाम के एक सरकारी स्कूल में वीर सावरकर की फोटो छपी कॉपी बाटने के बाद स्कूल के प्राचार्य को निलंबित करने के प्रश्न का उत्तर दे रहे थे ।
नेता प्रतिपक्ष ने दो माह पूर्व ही दे दिये थे सत्ता परिवर्तन के संकेत
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






