सिंधिया को चारों ओर से घेरने की तैयारी में सरकार, अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी को हटाया

सिंधिया को चारों ओर से घेरने की तैयारी में सरकार, अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी को हटाया

ग्वालियर/इंदौर। एक बार फिर कमलनाथ सरकार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अप्रत्यक्ष रूप से घेरते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी को हटा दिया हैै। अंकुर मोदी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाते हैं उनके स्थान पर राजीव शर्मा को अतिरिक्त महाधिवक्ता बनाया गया है। साथ ही हाईकोर्ट में ईओडब्ल्यू के विशेष अभियोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे सुशील चतुर्वेदी को उप महाधिवक्ता बनाया गया है। राजीव शर्मा और सुशील चतुर्वेदी, ये दोनों ही दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं। ये आदेश मध्यप्रदेश शासन विधि और विधायी कार्य विभाग ने जारी किया है।

15 फरवरी को एक सूची जारी कर 11 सरकारी वकीलों काे हटाकर उनकी जगह आठ नई नियुक्तियां हुई है। अब इन नई नियुक्तियाें के साथ ग्वालियर महाधिवक्ता दफ्तर में सरकारी वकीलाें  29 पद हैं और  11 पद अब भी रिक्त हैं। वहीं हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भी अंशुमान श्रीवास्तव को दूसरा उपमहाधिवक्ता बनाया है। इसी के साथ सरकारी पैरवी करने वाले 12 वकीलों को हटा दिया गया है और 19 को पूर्वानुसार रखा गया है। जिन 12 वकीलों को हटाया है उनके स्थान पर 13 नए वकील नियुक्त किये गये हैं और इन्हें मिलाकर अब यहां 32 सरकारी वकील हो गए हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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