
ग्वालियर में जीएसटी दरों में कटौती के बाद ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में गतिविधियां ठहर गई हैं। ग्वालियर ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिकांत समाधिया ने बताया कि कंपनियां नई दरों की घोषणा का इंतजार कर रही हैं, जिससे खरीदारी में भारी गिरावट आई है। वर्तमान में, केवल वाहनों की बुकिंग हो रही है, जबकि डिलीवरी 22 सितंबर के बाद ही संभव होगी।
इस कटौती के चलते ग्राहकों को छोटी गाड़ियों पर 50 हजार रुपये तक की बचत हो सकती है। इसी तरह, इलेक्ट्रॉनिक्स में भी जीएसटी दरें 28 से 18 प्रतिशत होने की संभावना है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा 22 सितंबर को की जाएगी। इस स्थिति ने ग्राहकों को खरीदारी से रोक दिया है, जिससे बाजार में 80 प्रतिशत तक की कमी आई है।
गाड़ियों की बुकिंग में कमी और डिलीवरी में देरी
हरिकांत समाधिया ने कहा कि कंपनियां सेस का कंपन्सेशन एडजस्ट नहीं करना चाहती हैं, जिसके कारण वे कई स्कीम्स को बंद करने पर विचार कर रही हैं। वर्तमान में, गाड़ियों की बुकिंग की जा रही है, लेकिन डिलीवरी में देरी हो रही है। ग्राहकों को अब 22 सितंबर का इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे बाजार में ठहराव की स्थिति बनी हुई है।
इस स्थिति का असर यह है कि ग्राहक अब नई दरों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खरीदारी में कोई प्रगति नहीं हो रही है। कंपनियों को इस ठहराव से निपटने के लिए नए उपायों पर विचार करना पड़ सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी ठहराव
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी केदारनाथ गुप्ता ने बताया कि जीएसटी की दरें कम होने से ग्राहकों को 75 इंच के एलईडी टीवी पर 10 हजार रुपये और 55 इंच के टीवी पर लगभग 3906 रुपये की बचत होगी। हालांकि, बाजार में खरीदारी की गतिविधियां ठप हो गई हैं। लोग अब 22 सितंबर का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में कोई हलचल नहीं है।
इस स्थिति ने ग्राहकों को खरीदारी से हतोत्साहित कर दिया है। कंपनियों को अब अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है ताकि वे ग्राहकों को आकर्षित कर सकें।
बीमा क्षेत्र पर भी प्रभाव
स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है, लेकिन बीमा कंसल्टेंट प्रणव कुमार दास ने बताया कि 22 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति बीमा कराने के लिए तैयार नहीं है। यहां तक कि लोग अपनी रिन्युअल प्रीमियम भी जमा नहीं कर रहे हैं, जिससे बीमा कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
कई बीमा कंपनियों ने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की थीं, लेकिन अब उन्हें या तो बंद करना पड़ा है या उनकी तारीख बढ़ानी पड़ी है। यह स्थिति बीमा क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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