अतिथि शिक्षकों ने सिंधिया को घेरा, कहा- आप सड़क पर आने वाले थे, क्या हुआ..?

अतिथि शिक्षकों ने सिंधिया को घेरा, कहा- आप सड़क पर आने वाले थे, क्या हुआ..?

ग्वालियर, अतुल सक्सेना
भाजपा (BJP) में आने से पूर्व ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अतिथि शिक्षकों (Guest Faculty) से मांगें पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरने का वादा किया था| इसी वादे को याद दिलाने और अपनी मांगों को पूरी कराने अतिथि शिक्षकों ने आज सिंधिया को घेर लिया| अतिथि शिक्षकों ने पूछा आप हमारे लिए सड़क पर आने वाले थे क्या हुआ, आज हम सड़क पर जरूर आ गए|

नियमितीकरण की मांग कर रहे अतिथि विद्वानो/अतिथि शिक्षकों ने रविवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्ञापन देकर अपनी पीड़ा बताई और उनकी मांगों को पूरा कराने का वादा याद दिलाया| अतिथि शिक्षकों ने बताया कि कोरोना काल में हमारी भूखे माँरने की नौबत आ गई है, कृपया दया कीजिये|

सिंधिया ने आश्वासन देते हुए कहा कि इस विषय में मुख्यमंत्री से बात करता हूँ| इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने वादाखिलाफी की है, इसके खिलाफ मेने भी बड़ा कदम उठाया है| इस सरकार में आपके साथ न्याय होगा|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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