कांग्रेस की गुटबाजी उजागर, 24 घंटे भी नहीं टिक पाई ग्वालियर जिले की टीम, इस्तीफों की झड़ी के बाद स्थगित

ग्वालियर जिले की कमेटी घोषित होते ही स्थानीय नेता आगबबूला हो गए, आपस में कहने लगे इतना अपमान सहन नहीं किया जायेगा स्वाभिमान से समझौता नहीं किया जायेगा, और धड़ाधड़ इस्तीफे होने लगे।
Congress Office, Gwalior

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मध्य प्रदेश कांग्रेस में कितनी गुटबाजी है ये आज एक बार फिर साबित हो गया, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर ग्वालियर जिले की कमेटी घोषित की, आज 30 जून को सुबह कमेटी घोषित हुई दोपहर में इस्तीफे शुरू हो गए और शाम होते होते कमेटी को स्थगित कर दिया गया।

दिल्ली में बैठे कांग्रेस के बड़े नेता मध्य प्रदेश कांग्रेस में सबकुछ ठीक होने का भले ही दावा करें लेकिन हकीकत इससे बहुत दूर है, हालिया जीतू पटवारी – दिग्विजय सिंह बयानबाजी एपिसोड ने इसकी कलई खोल ही दी लेकिन आज जो एक घटनाक्रम हुआ उसने साबित कर दिया कि कांग्रेस में फैसले संवाद और समर्पण से नहीं होते यहाँ सिर्फ गुटबाजी और आदेश चलता है।

जिले की लिस्ट को देख भड़के नेता 

दर असल मामला ग्वालियर शहर जिला कांग्रेस कमेटी से जुड़ा है, जिसकी घोषणा आज 30 जून को की गई, 27 जून की तारीख वाली 52 सदस्यीय कमेटी जैसे ही सोशल मीडिया पर दिखाई दी इसका रिएक्शन दिखाई देने लगा, नेताओं ने जब लिस्ट देखी तो एक्शन होने लगा एक दूसरे को फोन कर नाराजगी जताने लगे और कहने लगे कि इतना अपमान ..इसे सहन नहीं किया जायेगा।

24 घंटे भी नहीं टिक पाई नई कार्यकारिणी  

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लैटर हेड पर 30 जून सुबह 52 सदस्यीय ग्वालियर जिले की कमेटी घोषित हुई और दोपहर होते होते नेताओं के इस्तीफों की झड़ी लगने लगी, वरिष्ठ नेता लतीफ़ खां मल्लू को पार्टी ने सचिव की जिम्मेदारी दी लेकिन उनका नाम सूची में 47वें नंबर पर था जबकि बहुत जूनियर नेताओं को वरिष्ठ पद भी दिए गए और उनका नाम भी सूची में बहुत ऊपर था इससे वे नाराज हो गए और इस्तीफा जीतू पटवारी को भेजकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

इस्तीफों की झड़ी के बाद कमेटी स्थगित 

लतीफ़ खां के इस्तीफे के बाद एक के बाद एक कई नेताओं ने पदों से इस्तीफे दे दिए, प्रतीक जैन, ऊदल सिंह, राम अवतार जाटव, सुरेश प्रजापति,  मुरारी लाल ओझा, राकेश अग्रवाल सहित कई अन्य नेताओं के इस्तीफे सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, ग्वालियर में हुए हंगामे की सूचना भोपाल तक पहुंची और संगठन ने तत्काल फैसला लेते हुए और किरकिरी से बचने के लिए पत्र जारी कर ग्वालियर की घोषित कमेटी को स्थगित कर दिया, नये आदेश में लिखा  आंशिक संशोधन के लिए ग्वालियर जिले की कार्यकारिणी को स्थगित किया जाता है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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