Gwalior News : व्हाइट टाइगर के दूसरे शावक की भी मौत, किडनी संक्रमण बनी वजह, गांधी प्राणी उद्यान में मातम

Gwalior News : व्हाइट टाइगर के दूसरे शावक की भी मौत, किडनी संक्रमण बनी वजह, गांधी प्राणी उद्यान में मातम

Gwalior News : ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान से एक बार फिर दुखद खबर सामने आई है, यहाँ सफेद टाइगर मीरा के पांच महीने के शावक की मौत हो गई, खास बात ये है कि पिछले महीने ही मीरा के ही एक शावक की मौत हुई थी और तभी से दूसरा शवक बीमार चल रहा था, जबलपुर से आये विशेषज्ञ पशु चिकित्सक भी शावक को नहीं बचा पाए, एक महीने के अन्दर ही दो शावकों की मौत से गांधी प्राणी उद्यान में मातम पसरा हुआ है।

20 अप्रैल को टाइगर मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया अगले ही दिन एक की मौत गई 

ग्वालियर के चिड़ियाघर (गांधी प्राणी उद्यान) में 20 अप्रैल 2023 को उस समय खुशियों की लहर दौड़ पड़ी थी जब सफ़ेद टाइगर मीरा ने एक साथ तीन शावकों को जन्म दिया, इनमें दो मादा टाइगर और एक नर शावक था, लेकिन इन खुशियों को तन ग्रहण लगा जन अगले ही दिन 21 अप्रैल को एक मादा सफ़ेद शावक की मौत हो गई, मौत का कारण हर फेल बताया गया।

जबलपुर वेटेनरी कॉलेज के चिकित्सकों ने किय इलाज, बीती रात दूसरे मादा शावक ने भी दम तोड़ा

चिकित्सकों के परीक्षण में 4 अक्टूबर को मालूम चला कि दूसरा मादा शावक बीमार है, गांधी प्राणी उद्यान प्रबंधन ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर जबलपुर वेटेनरी कॉलेज को सूचित किया फिर वहां से डॉक्टर्स की टीम ने उसका इलाज शुरू किया, बीच में कुछ समय शावक ठीक लगा लेकिन आखिरकार बीती रात पांच महीने जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद उसने अलविदा कह दिया।

नियमानुसार किया शावक का अंतिम संस्कार 

मीरा के दोनों मादा शावकों की मौत के बाद जहाँ टाइगर मीरा और उसका तीसरा शावक(नर) सुस्त और गुमसुम हैं वहीँ गांधी प्राणी उद्यान में मातम पसरा हुआ है, चिड़ियाघर प्रबंधन के अधिकारियों ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में टाइगर शावक का अंतिम संस्कार किया।

चिड़ियाघर में मातम, किडनी संक्रमण बनी मौत की वजह 

15 दिन में दूसरे शावक की मौत से चिड़ियाघर प्रबंधन मायूस और चिंतित है, शावक की मौत का कारण किडनी में इंफेक्शन सामने आया है, तबियत ज्यादा ख़राब होने के कारण पिछले कुछ दिनों से शावक ने खाना पीना छोड़ दिया था, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ एबी श्रीवास्तव ने बताया करीब 5 महीने का शावक 10 दिन से बीमार था। उसे लाइफ सेविंग ड्रग्स, न्यूट्रिशन ड्रिप के द्वारा दी जा रही थी। हम लगातार इसपर नजर रखे हुए थे लेकिन इसके स्वास्थ में अचानक गिरावट आ गई और लंग्स में इंफेक्शन आ गया कुछ अन्य बीमारियां भी डवलप हो गई और फिर उसकी मौत हो गई, उन्होंने कहा कि शावक की मौत से तीसरे शावक या अन्य किसी को कोई खतरा नहीं है।

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ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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