तेज धमाके से थर्राया ग्वालियर, दहशत में आये लोग, जानिये क्या थी वजह

तेज धमाके से थर्राया ग्वालियर, दहशत में आये लोग, जानिये क्या थी वजह

ग्वालियर। अतुल सक्सेना | बुधवार की रात करीब पौने नौ बजे ग्वालियर (Gwalior) के लोग अचानक तेज धमाके की आवाज से दहशत में आ गए। शहर से लेकर गाँव तक कई किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई दी। लोग भूकंप (Earthquake) की आशंका के चलते घरों के बाहर निकल आये।

ग्वालियर में बुधवार को अचानक आई तेज आवाज ने शहर के लोगों को दहशत में डाल दिया। रात को लोगों ने करीब पौने नौ बजे एक तेज धमाका सुना। धमाके के साथ तेज कंपन भी महसूस किया गया। धमाके की आवाज पूरे जिले में शहर से गाँव तक सुनाई दी। लोग भूकंप के डर से बाहर निकल आये। व्हाट्स एप और मोबाइल पर संदेश आने लगे लोग एक दूसरे की खैरियत जानने लगे। कुछ ही देर में धमाके की खबर आग की तरह फैल गई।

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने धमाके की आवाज की पुष्टि की लेकिन उन्होंने कहा कि ये क्यों आई इस बारे में उन्हें अभी जानकारी नहीं है। उधर जब एमपी ब्रेकिंग न्यूज ने सीएसपी महाराजपुरा रवि भदौरिया से इस विषय में बात की तो उन्होंने बताया कि महाराजपुरा एयर बेस से फाइटर प्लेन (Fighter PLane) ने उड़ान भरी थी। जब ये विमान सुपर सोनिक स्पीड से उड़ते हैं और किसी पर्टिकुलर हाईट को पार करते हैं तो एकजोस्ट् होता है और इस तरह के धमाके की आवाज आती है। बहरहाल प्रशासन की अपनी दलील है लेकिन धमाके ने कुछ देर के लिए ही सही लोगों को डरा दिया था।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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