होमगार्ड सैनिकों ने किया घर बैठाने के आदेश का विरोध, प्रदर्शन कर सौंपा राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

होमगार्ड सैनिकों ने किया घर बैठाने के आदेश का विरोध, प्रदर्शन कर सौंपा राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

ग्वालियर। होमगार्ड में पदस्थ कर्मचारियों ने शुक्रवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अभी 22 जनवरी को शासन ने पत्र भेजकर कहा है कि एक फरवरी को सभी की किट जमा हो जायेगी और दो महीने के लिए सभी को घर बैठा दिया जायेगा जिसका वेतन नहीं मिलेगा और जब वापस सेवा में लिया जायेगा तो उस चरित्र सत्यापन देना होगा और उसका मेडिकल होगा और जो मेडिकल में अन फिट होगा तो उसे नहीं रखा जायेगा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नायक सुरेंद्र सिंह सिकरवार का कहना था कि ऐसा कहीं नहीं होता कि सर्विस में रहने के दौरान मेडिकल कराया जाए उन्होंने कहा कि शासन कोर्ट के नियम का भी उल्लंघन कर रहा है। क्योंकि 2011 में एमपी हाई कोर्ट की जबलपुर डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट ने घर बैठाने के नियम के खिलाफ फैसला दिया था और तभी से हम लगातार सेवाएं दे रहे हैं। डीजी होमगार्ड पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्होंने मनमाना नियम बनाया है जिसे लागू नहीं होने दिया जायेगा। कर्मचारियों ने संभाग आयुक्त को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा और चेतावनी दी कि यदि इस नियम को वापस नहीं लिया गया तो मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का भोपाल जाकर घेराव किया जायेगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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