Gwalior: बाजार बंद-सड़कें सूनी, सेनेटाइजर स्प्रे कर रहा निगम अमला

Gwalior: बाजार बंद-सड़कें सूनी, सेनेटाइजर स्प्रे कर रहा निगम अमला

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री की जनता कर्फ्यू की अपील ग्वालियर में प्रभावी दिखाई दे रही है। लोग सुबह से सड़कों पर नहीं निकले। इक्का दुक्का लोगों के अलावा, पत्रकार, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी ही दिखाई देरहे है। उधर नगर निगम का अमला शहर में सेनेटाइज़र स्प्रे कर शहर को सुरक्षित कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की अपील के बाद ग्वालियर जिला दंडाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने ग्वालियर में 22 मार्च से 24 मार्च तक लॉक डाउन घोषित कर दिया है। आज रविवार को प्रभावी जनता कर्फ्यू का असर सुबह से ही देखने को मिल रहा है। सुबह सुबह जगाने वाले, दूधवाले, सब्जी वाले , पेपर वाले तक की आवाज कई जगह सुनाई नहीं दी। अधिकांश मोहल्लों और कॉलोनियों में तो नगर निगम की कचरा गाडिया नहीं पहुंची और जहाँ पहुंची वहाँ लोग कचरा डालने नहीं पहुंचे। रोज काम कर अपना परिवार पालने वाले श्रमिकों भी जनता कर्फ्यू में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। शहर मे महाराज बाड़ा, हजीरा, गोला का मंदिर, दौलतगंज सहित अन्य कई क्षेत्रों में जुटने वाले दिहाड़ी श्रमिक आज वहाँ नहीं पहुंचे। सड़कों के सूने रहने और प्रतिष्ठानों, अस्पतालो, दुकानों के बंद होने का लाभ उठाते हुए नगर निगम के कर्मचारियों ने सेनेटाइज़र स्प्रे कर उन्हें संक्रमण मुक्त किया। प्रशासन और पुकीस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार राउंड पर हैं। पुलिस फोर्स सड़कों पर तैनात है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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