कमलनाथ के ग्वालियर दौरे पर बोले “महाराज” हमारे अंदर कटुता का भाव नहीं “अतिथि देवो भवः”

कमलनाथ के ग्वालियर दौरे पर बोले “महाराज” हमारे अंदर कटुता का भाव नहीं “अतिथि देवो भवः”

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| विधानसभा उपचुनावों (By-election) से पहले नेताओं की एक-एक प्रतिक्रिया और उनके दौरे बहुत मायने रखते हैं। पिछले कुछ दिनों से एक दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे नेताओं की बातों के बीच सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का नया बयान सामने आया है| लेकिन इस बयान में राजनीति नहीं आतिथ्य है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) का शहर में स्वागत करते हुए सिंधिया ने कहा कि “अतिथि देवो भवः”।

सूफी संत मंसूर शाह बाबा के उर्स की अपनी पारंपरिक रियासती परंपरा का निर्वहन करने गुरुवार को सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर आए। जय विलास पैलेस में शहर के लोगों ने उनसे मुलाकात की और अपनी समस्यायें बताईं। मीडिया से बात करते हुए सिंधिया ने प्रदेश सरकार की विकास कार्यों का गुनगान किया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी की सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत कम समय में बहुत ज्यादा काम किया है। करोड़ों रुपये की योजनाएं स्वीकृत की हैं जिसमें स्वर्ण रेखा नदी पर एलिवेटेड रोड और अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित चंबल एक्सप्रेस वे दो बहुत खास हैं।

हमारे अंदर कटुता का भाव नहीं “अतिथि देवो भवः”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक मीडियापर्सन के चुनावों में कांग्रेस को निपटाने की रणनीति बनाने की बात का जवाब देते हुए कहा कि हम किसी को निपटाने की बात नहीं करते, हम विकास की बात करते हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के ग्वालियर दौरे से जुड़े सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि “हमारे अंदर कटुता का भाव नहीं हैं, ग्वालियर मेरा घर है आप सबका घर है। जो भी मेहमान यह आयेगा उसका स्वागत ” अतिथि देवो भवः” की परंपरा के हिसाब से होगा और जब चुनाव होंगे तो जनता उचित निर्णय सुनाकर उन्हें वापस भेजेगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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