आदेश बना मुसीबत, कलेक्ट्रेट पहुंची भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग बना मजाक

आदेश बना मुसीबत, कलेक्ट्रेट पहुंची भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग बना मजाक

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| कोरोना (Corona) महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) को सबसे महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है और इसका पालन कराने की जिम्मेदारी जिले के मुखिया यानि कलेक्टर (Collector) की होती है| लेकिन ग्वालियर में कलेक्टर कार्यालय (Collector Office) में ही यदि इसकी धज्जियां उड़ाई जाएं तो आप क्या कहेंगे? लोगों को डर है कि ये उल्लंघन कहीं कोरोना को आमंत्रण न दे दे।

कोरोना के कारण जिला दंडाधिकारी यानि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह रोज नये नये आदेश निकाल रहे हैं। और यही आदेश मुसीबत बन रहे हैं। जिले भर को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने वाले डीएम साहब अपने ही ऑफिस में इसका पालन नहीं करा पा रहे हैं । कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक आदेश निकाल कर निर्देश दिया कि मेडिकल इमरजेन्सी, अंतिम संस्कार, कृषि कार्य एवं अन्य जिलों में के कर्मचारियों को ड्यूटी में जाने की अनुमति के डिप्टी कलेक्टर संजीव खेमरिया को नोडल अधिकारी बनाया गया है। बीती शाम निकाले गए आदेश का असर ये हुआ कि लोग पास अर्थात अनुमति के लिए कलेक्ट्रेट पहुँचने लगे। कुछ देर में ही डिप्टी कलेक्टर संजीव खेमारिया के कार्यलय के बाहर भीड़ जमा हो गई। हालांकि लोग मास्क लगाए थे लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की किसी को परवाह नहीं थी। कुछ लोग तो भीड़ देखकर दूर से ही लौट आये। उनका तर्क था कि ये कोरोना को कलेक्ट्रेट में आमंत्रण नहीं है। क्या मालूम भीड़ में कौन संक्रमित है और स्वस्थ ? बहरहाल कलेक्ट्रेट में सोशल डिस्टेंसिंग उड़ने की बात शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews